कोरोना संक्रमण से अध्यापक की मौत, चुनावी प्रशिक्षण बना मौत का कारण
 

 
कोरोना संक्रमण से अध्यापक की मौत, चुनावी प्रशिक्षण बना मौत का कारण

कानपुर। बेसिक शिक्षा विभाग के सहायक अध्यापक की कोरोनावायरस से मौत हो गई। पिछले 4 दिनों से आईसीयू में वेंटिलेटर पर वह जीवन और मौत के बीच झूल रहा था। चुनावी प्रशिक्षण अध्यापक की मौत का कारण बना।

कल्याणपुर सत्यम बिहार निवासी नीरज गुप्ता बहराइच जिले के जरवल ब्लॉक में हाजीपुर प्राथमिक विद्यालय में बतौर सहायक अध्यापक कार्यरत थे। पंचायत चुनाव में उनकी ड्यूटी लगा दी गई थी जिसकी वजह से उन्हें मजबूरन 11 अप्रैल को प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होना पड़ा, जहां से वह कोरोना की चपेट में आ गए। अध्यापक के परिजनों की मानें तो उनकी चुनाव ड्यूटी पीठासीन अधिकारी के रूप में 29 अप्रैल को लगा दी गई थी क्योंकि 25 मार्च को उनकी पत्नी महिमा गुप्ता का ऑपरेशन हुआ था और 5 महीने के गर्भस्थ शिशु की मृत्यु हुई थी। इस वजह से वे काफी परेशान चल रहे थे और पत्नी के इलाज के संबंध में फॉलोअप के लिए चुनाव की तिथि वाले दिन उनका पीजीआई में अपॉइंटमेंट था। इस वजह से वह चुनाव ड्यूटी से नाम कटवाने के लिए 9 अप्रैल को सीडीओ कार्यालय में आवेदन किया।

सारी औपचारिकताएं पूर्ण करने के बाद भी चुनाव ड्यूटी से नाम नहीं कटा तो उन्हें मजबूरन चुनावी प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेना पड़ा। जहां से वह कोरोना की चपेट में आ गए। उसके बाद से लगातार उनकी तबीयत खराब होती चली गई। लगातार कई प्रयास के बावजूद भी उन्हें जब सरकारी अस्पतालों से कोई इलाज नहीं मिल सका तो उन्होंने प्राइवेट डॉक्टरों से अपना इलाज शुरू कराया और कोरोना की जांच कराई, जिसकी रिपोर्ट जब तक आई उनकी हालत गंभीर हो चुकी थी। मेडिकल लीव के लिए आवेदन कर वह कानपुर अपने घर आ गए। सरकारी अस्पताल में दिए गए सैंपल की जांच रिपोर्ट ना आने पर उन्होंने प्राइवेट लैब से कोरोना की जांच कराई लेकिन उससे पहले ही उनकी उन्हें सांस लेने में काफी तकलीफ होने लगी।

इस पर प्राइवेट नर्सिंग होम के डॉक्टर की सलाह पर चेस्ट का सीटी स्कैन कराया जिसकी रिपोर्ट में 80% फेफड़ों में संक्रमण की पुष्टि हुई। इस रिपोर्ट के बाद उन्हें काफी भटकने के बाद सिविल लाइंस के न्यू लीलामणि हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां से हालत में सुधार ना होने पर उन्हें आईसीयू में बाईपैप मशीन पर और फिर वेंटिलेटर पर रखा गया। 30 अप्रैल को उनकी अचानक मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि चुनावी प्रशिक्षण कार्यक्रम उनकी मौत का कारण बना। पूरे परिवार का वही एकमात्र सहारा थे। बुजुर्ग माता, विकलांग चाचा, पत्नी और 6 साल के एक बच्चे की संपूर्ण जिम्मेदारी उन्हीं पर थी। अब इस परिवार का कौन भरण पोषण करेगा। इस घटना से शिक्षक समूह में काफी आक्रोश है। शिक्षक नेताओं ने मृतक अध्यापक की पत्नी को मृतक आश्रित कोटे से नौकरी दिये जा ने और चुनाव प्रशिक्षण की वजह से कोरोना की भेंट चढ़ने पर सरकार से 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग की है।