जनवरी से यूपी के अस्पतालों में बदल जाएंगे पंजीकरण मानक

ऐसे सभी अस्पतालों को 31 मार्च से पहले अपना पंजीकरण द क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट 2010 के तय मानकों के तहत कराना होगा। इस संबंध में महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं द्वारा पंजीकरण के लिए बने पोर्टल में नई व्यवस्था के हिसाब से जरूरी सुधार या संशोधन कर लिए जाएंगे।

 
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प्रदेश में नए साल यानी पहली जनवरी से अस्पतालों के पंजीकरण मानक बदल जाएंगे। अब हीलाहवाली और निचले स्तर पर सेटिंग काम नहीं आएगी। अस्पताल संचालकों को केंद्र द्वारा द क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट 2010 के तय सभी मानकों का पालन करना होगा।

इस मामले में हीलाहवाली करने वालों को जुर्माना भी भुगतना होगा। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद ने महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, समस्त डीएम और सीएमओ को निर्देश जारी किया है। जिलों में अस्पतालों के पंजीकरण का काम अभी सीएमओ के स्तर से होता था। मगर अब डीएम की अध्यक्षता वाली जिला रजिस्ट्रीकरण प्राधिकरण द्वारा किया जाएगा। 

इसके अलावा प्रदेश स्तर पर राज्य नैदानिक स्थापन परिषद होगी, जो अपील संबंधी मामलों में सुनवाई करेगी। अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद ने कहा है कि अस्पतालों के पंजीकरण की मौजूदा व्यवस्था इस साल 31 दिसंबर के बाद लागू नहीं रहेगी। वर्तमान व्यवस्था के तहत पंजीकृत सभी अस्पतालों के पंजीकरण की वैधता 31 मार्च 2022 को स्वत: खत्म हो जाएगी। 

ऐसे सभी अस्पतालों को 31 मार्च से पहले अपना पंजीकरण द क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट 2010 के तय मानकों के तहत कराना होगा। इस संबंध में महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं द्वारा पंजीकरण के लिए बने पोर्टल में नई व्यवस्था के हिसाब से जरूरी सुधार या संशोधन कर लिए जाएंगे।

यह काम इसी साल 15 दिसंबर से पूर्व करना होगा। 15 दिसंबर से इस पोर्टल पर आवेदन सुविधा उपलब्ध करा दी जाएगी। इस संबंध में सभी सीएमओ और डिप्टी सीएमओ का प्रशिक्षण भी 15 दिसंबर से पहले पूरा करा लिया जाएगा।