नन रेप कांड में आरोपी बिशप के बरी होने पर उठे सवाल

विशेष जांच दल ने अप्रैल 2019 में 2,000 पन्नों का आरोप पत्र दाखिल किया था। नवंबर 2019 में सुनवाई शुरू हई। 105 दिन चली सुनवाई से 39 गवाहों से पूछताछ हुई। इसके बावजूद आरोपी बिशप बरी कर दिया गया। प्रारंभिक रिपोर्टों की मानें तो वैज्ञानिक सबूतों की कमी के कारण उन्हें बरी कर दिया गया। फैसले के बाद पीड़िता की एक सहयोगी ने कहा कि ऐसा लगता है कि अमीर और रसूखदार लोग कुछ भी कर सकते हैं।

 
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केरल की कोर्ट ने एक नन से तीन साल में 13 बार दुष्कर्म के आरोपी कैथोलिक बिशप फ्रेंको मुलक्कल (57) को शुक्रवार को बरी कर दिया। फैसले के इंतजार में शुक्रवार सुबह से कोट्टायम जिला कोर्ट परिसद में बड़ी संख्या में लोग जुटे थे। सुबह 11 बजे अतिरिक्त जिला जज जी. गोपाकुमार ने कहा, बिशप फ्रेंको मुलक्कल को कोट्टायम कॉन्वेंट की नन की ओर से लगाए गए दुष्कर्म के आरोपों का दोषी नहीं पाया गया। इतना सुनते ही कोर्ट में मौजूद लोग एक-दूसरे को देखते रह गए। किसी को भरोसा नहीं हुआ की बिशप को बरी कर दिया गया है।


विशेष जांच दल ने अप्रैल 2019 में 2,000 पन्नों का आरोप पत्र दाखिल किया था। नवंबर 2019 में सुनवाई शुरू हई। 105 दिन चली सुनवाई से 39 गवाहों से पूछताछ हुई। इसके बावजूद आरोपी बिशप बरी कर दिया गया। प्रारंभिक रिपोर्टों की मानें तो वैज्ञानिक सबूतों की कमी के कारण उन्हें बरी कर दिया गया। फैसले के बाद पीड़िता की एक सहयोगी ने कहा कि ऐसा लगता है कि अमीर और रसूखदार लोग कुछ भी कर सकते हैं।


सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील देवेंद्र शर्मा ने कहा कि इस फैसले ने सबको झकझोर कर रख दिया है। अदालत ने किस आधार पर आरोपी को बरी किया है, इस पर न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार ही टिप्पणी होगी। उन्होंने कहा कि कोर्ट यह दिखाने में विफल रहा है कि न्याय हो रहा है। इस मामले में लोगों को यह स्वीकार नहीं हो पा रहा कि अदालत ने न्याय किया है। फिलहाल यह मामला अपील में जाएगा और चीजें साफ हो पाएंगी।