कोरोना की वजह से दूसरे साल भी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा बिना भक्तों के निकलेगी

 
कोरोना की वजह से दूसरे साल भी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा बिना भक्तों के निकलेगी

बोकारो से संगीता की रिपोर्ट

इस साल भी महामारी को देखते हुए  जगन्नाथ रथ यात्रा नहीं निकाली जाएगी आपको बताते जाए कि पिछले साल भी कोरोना के कारण ही रथ यात्रा नहीं निकाली गई थी। फिर इस साल भी महामारी को देखते हुए कोरापुट बारीपदा केंद्रपाड़ा और नीलगिरी सहित राज्य के अन्य सभी हिस्सों में रथ यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी रथ यात्रा से संबंधित अनुष्ठान मंदिर परिसर में किए जा सकते हैं बताते जाए कि इस बार जगन्नाथ रथ यात्रा 11 जुलाई को भगवान जगन्नाथ और उनके भाई बहनों की रथयात्रा अगले महीने पूरी में बिना किसी भक्तों की उपस्थिति में आयोजित की जाएगी विशेष राहत आयुक्त प्रदीप जेना ने गुरुवार को कहा कि रथयात्रा पिछले साल सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशानिर्देश के अनुसार 11 जुलाई को होगी इसे अनुमति देने से इनकार करने के बाद शीर्ष अदालत ने पिछले साल इस शर्त पर रथ यात्रा की अनुमति दी थी कि कोई  सर्वजनिक उपस्थिति नहीं होगी और पूरी में सभी एंट्री प्वाइंट बंद रहेंगे जैन ने कहा औरतों को खींचना शायद केवल 2 पुलिसकर्मियों और एक जेडीए द्वारा अनुमति प्राप्त किसी अन्य अधिकारी द्वारा किया जाता है

केवल मंदिर सेवक जिन्हें या तो पूरी तरह से टीका लगाया गया है या जिनकी 48 घंटे पहले की एंट्री पीसीआर रिपोर्ट नकारात्मक होगी उन्हें यह रथयात्रा अनुष्ठान करने की अनुमति दी जाएगी दो रथ को खींचने के लिए प्राप्त अंतराल होगा प्रत्येक रखने को 500 से अधिक व्यक्ति द्वारा नहीं खींचा जाएगा और जहां तक संभव हो व्यक्तियों द्वारा सामाजिक दूरी बनाए रखी जाएगी विशेष तौर पर रथयात्रा को उड़ीसा के लोगों के सामाजिक धार्मिक एवं सांस्कृतिक लोकाचार के हिस्से के रूप में माना जाता है यह उड़ीसा के मुख्य त्योहारों में से एक है जो भगवान जगन्नाथ और उनके भाई बहनों की 12 वीं शताब्दी की जगन्नाथ मंदिर से  गुड़ीचा  मंदिर में पूरी शहर में ढाई किलो मीटर दूर उनकी चाची के निवास के वार्षिक यात्रा की याद दिलाता है रथ यात्रा के दौरान पूरी शहर में एक लाख भक्तों यह विश्वास करते हुए जुड़ते हैं कि वे रथो से जुड़ी राशि को छूकर मोक्ष प्राप्त करेंगे * गुड़ीचा  मंदिर में 9 दिनों तक रहने के बाद तीनों देवता बहुदा यात्रा नामक वापसी यात्रा में दसवें दिन जगन्नाथ मंदिर में वापस आते हैं।