जन जन तक है पहुँचाना, राष्ट्रभाषा हिन्दी को है बनाना.. भारत के माथे की बिंदी है हिंदी

 
जन जन तक है पहुँचाना, राष्ट्रभाषा हिन्दी को है बनाना.. भारत के माथे की बिंदी

अनुराग्यम् की अनूठी पहल " हमारी राजभाषा हिंदी " पुस्तक जो की पूर्ण रूप से राजभाषा हिंदी को समर्पित है ।

"हमारी राजभाषा हिंदी" पुस्तक, इस प्रयास का हिस्सा बनने के लिए 'अनुराग्यम्' परिवार भी अग्रसर है राजभाषा हिंदी को उन्नत बनाने के लिए हम आप सभी साथियों से हिंदी में भाषा आलेख , कहानियां निबंध संस्मरण, यात्रा वृतांत ,पत्र ,डायरी, लघुकथा, कविताएं, किंवदंतियाँ, सूक्तियां, अनमोल वचन, चुटकुले, पहेलियां और साहित्य की कोई भी विधा आमंत्रित करते हैं और रचते हैं मिल जुल कर एक ऐसी अनुपम पुस्तक (हमारी राजभाषा हिंदी) जो हमें मातृभाषा के और निकट ले जा सकें ।

अपने ही देश में पराई होती मातृ भाषा हिन्दी का दर्द अकथनीय है , हम भूलते जा रहे हैं हमारी मातृभाषा । हिन्दी दिवस को मात्र एक दिन का ना होके हम हर दिन हिन्दी को प्रेम दें और उससे बढ़ कर हिन्दी को अपनाएं, तो चलिए एकजुट हो इस दिशा में कदम रखते हैं ।

आप सबकी रचनाओं का स्वागत है, तो बस देर किस बात की, आप भी भागीदारी कीजिए व अपने सह लेखकों के साथ भी ये संदेश साझा कीजिए , चलते हैं फिर हिंदी से हिन्दी की ओर। आप सब के प्रयास को देख कर अनुराग्यम् ने इस पुस्तिका में रचना भेजने की अंतिम थी को आगे बढ़ा दिया है ।