क्वाड से चीन और बांग्लादेश के रिश्तों में दरार पड़ेगी क्या?

 
क्वाड से चीन और बांग्लादेश के रिश्तों में दरार पड़ेगी क्या?

चीन ने हाल ही में बांग्लादेश को अमेरिका के नेतृत्व वाले चार देशों के सुरक्षा समूह क्वाड में शामिल होने को लेकर खुली चेतावनी दी है. चीन की इस चेतावनी पर भारतीय उप-महाद्वीप में जानकार हैरानी जता रहा हैं. असल में बांग्लादेश में चीन के राजदूत ली जिमिंग ने पत्रकारों के साथ एक मुलाक़ात के दौरान, बड़े आक्रामक तरीक़े से बांग्लादेश को धमकाया था. ये तरीक़ा ही लोगों के नाक-भौं सिकोड़ने की बड़ी वजह है. लोग हैरान हैं कि आख़िर पत्रकारों के साथ मुलाक़ात में कूटनीतिक चेतावनी देने की वजह क्या है.

लेकिन ये कहना ठीक नहीं होगा कि चीन ने अचानक ही बांग्लादेश को चेतावनी जारी कर दी. चीन, इस बात पर लगातार नज़र बनाए हुए है कि एशिया में अमेरिका किस तरह अपने सहयोगियों को एकजुट कर रहा है. क्वाड इस मामले में उसकी दिलचस्पी का नया कारण बना है.

चीन पहले भी दुनिया में अमेरिका की भूमिका को लेकर कूटनीतिक माध्यमों और मीडिया के ज़रिए अपनी चिंताएं जताता रहा है. चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने ली जिमिंग के हवाले से लिखा था कि अमेरिका, चीन और बांग्लादेश के बीच दरार डालने की कोशिश कर रहा है.

बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमिन ने चीन के राजदूत के बयान को 'अफ़सोसनाक' बताया और कहा कि बांग्लादेश 'अपनी विदेश नीति ख़ुद बनाता है, हालांकि हर देश किसी विषय पर अपना पक्ष मज़बूती से रखने के लिए स्वतंत्र है.'

चीन के इस आक्रामक रवैये का कारण क्या है?

चीन के राजदूत ने ये बयान दस मई को दिया था. जिसमें उन्होंने कहा था कि 'अगर बांग्लादेश क्वाड का हिस्सा बनता है, तो चीन के साथ उसके संबंधों को बहुत नुक़सान होगा'. इस बयान ने बांग्लादेश की सरकार और उसके मीडिया को हैरानी में डाल दिया था.

बांग्लादेश के मशहूर अंग्रेज़ी अख़बार, द डेली स्टार ने 12 मई को बेहद सख़्त रुख़ लफ़्ज़ों वाला एक संपादकीय लिखा था. इस संपादकीय में अख़बार ने लिखा था कि, 'ऐसा लगता है कि चीन इस बात को लेकर परेशान है कि बांग्लादेश क्वाड की पहल का हिस्सा बन जाएगा. इसकी क्या वजह है, ये हमें नहीं मालूम. चीन की परेशानी का कारण जो भी हो लेकिन, इस बात को लेकर किसी को कोई संदेह नहीं होनी चाहिए कि इस बारे में कोई भी फ़ैसला सिर्फ़ बांग्लादेश की सरकार ले सकती है'.

इससे पहले चीन हमेशा ही बांग्लादेश को सीधे तौर पर क्वाड में शामिल होने से मना करने से बचता आया था. लेकिन, इसे लेकर दोनों देशों के रिश्तों में तनाव काफ़ी दिनों से बढ़ रहा था.

चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स को अक्टूबर 2020 में दिए एक इंटरव्यू में, बांग्लादेश में चीन के राजदूत ली जिमिंग ने कहा था कि, "अमेरिका लगातार ऐसे क़दम उठा रहा है, जिनके पीछे उसके इरादे नेक नहीं हैं. वो ऐसे प्रयास कर रहा है जिससे बांग्लादेश, 'चीन विरोधी समूह' में शामिल हो जाए."

ली जिमिंग का इशारा, उस समय अमेरिका के रक्षा मंत्री रहे मार्क एस्पर की बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के साथ टेलीफ़ोन पर सितंबर 2020 में हुई बातचीत की ओर था. एस्पर और शेख़ हसीना के बीच टेलीफ़ोन पर इस बातचीत के एक महीने बाद अमेरिका के पूर्व उप रक्षा मंत्री स्टीफ़न बिगन, बांग्लादेश के दौरे पर भी आए थे.

ग्लोबल टाइम्स को इंटरव्यू में ली जिमिंग ने ये भी कहा था कि, 'कोविड-19 महामारी, अमेरिका और चीन के बीच ज़बरदस्त तनाव और भारत व चीन के बीच सीमा पर संघर्ष से बांग्लादेश के आस-पास के माहौल में काफ़ी बदलाव आ गया है.' दुनिया में इसे चीन की 'वोल्फ़ वॉरियर डिप्लोमेसी कहा जाता है.' इस कूटनीति के तहत चीन की सरकार के संदेशवाहक, चीन की सुरक्षा और व्यापारिक हितों को लेकर सख़्त बयान देते हैं.

18 मई को अपने एक संपादकीय में भारतीय अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा था कि, 'आख़िर क्या वजह है कि चीन के राजदूत अपने मेज़बान देश के ख़िलाफ़ ऐसी तल्ख़ टिप्पणियां कर रहे थे, जबकि बांग्लादेश का तो चीन के संवेदनशील मसलों पर चोट पहुंचाने का कोई रिकॉर्ड भी नहीं रहा है. ऐसा लगता है कि ढाका में क्वाड के बारे में बात करते हुए, चीन के राजदूत बांग्लादेश के लिए बस एक लक्ष्मण रेखा खींच रहे थे'.

अप्रैल 2021 में चीन के रक्षा मंत्री वेई फेंघे ने बांग्लादेश का दौरा किया था. बांग्लादेश के अख़बार प्रोथोम अलो ने 1 मई को सूत्रों के हवाले से ख़बर दी थी कि चीन के रक्षा मंत्री ने इस दौरान बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद अब्दुल हामिद से कहा था कि चीन 'इस क्षेत्र की शांति, स्थिरता और विकास के लिए चाहता है कि बांग्लादेश उसके पाले में रहे'.

चीन के सैन्य और व्यापारिक हित

बांग्लादेश अपनी रक्षा ख़रीद का ज़्यादातर हिस्सा चीन से आयात करता है. भारत के अख़बार फाइनेंशियल एक्सप्रेस के मुताबिक़, बांग्लादेश की सेनाओं के पास इस वक़्त जो भी हथियार हैं, उनमें से 86 प्रतिशत चीन से हासिल किए गए हैं.

चीन के रक्षा मंत्री वेई फेंघे ने अप्रैल में कहा था कि चीन और बांग्लादेश को, 'मिलकर ऐसी ताक़तों के ख़िलाफ़ साझा प्रयास करने चाहिए, जो इस क्षेत्र के बाहर से आकर दक्षिण एशिया में सैन्य गठबंधन बना रहे हैं.' वेई फेंघे का सीधा इशारा अमेरिका द्वारा बांग्लादेश के साथ सैन्य संबंध विकसित करने में दिलचस्पी दिखाने को लेकर था.

अक्टूबर 2019 में बांग्लादेश ने अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर और मिसाइल सिस्टम ख़रीदने के लिए अमेरिका से बातचीत शुरू की थी. ढाका में अमेरिकी दूतावास ने एक बयान में कहा था कि, 'हम बांग्लादेश के सैन्य बलों को, उनके लक्ष्य 2030 को हासिल करने में मदद करना चाहते हैं, क्योंकि, बांग्लादेश अपने सैन्य उपकरणों का आधुनिकीकरण करना चाहता है'.

ख़बर ये भी है कि अमेरिका और बांग्लादेश, आपस में ख़ुफ़िया जानकारियां साझा करने का समझौता करने के लिए भी बातचीत कर रहे हैं. ये जनरल सिक्योरिटी ऑफ़ मिलिट्री इन्फॉर्मेशन एग्रीमेंट (GSOMIA)और एक्विज़िशन क्रॉस सर्विसिंग एग्रीमेंट (ACSA) के समझौते हो सकते हैं. इस साल मार्च में भारत ने बांग्लादेश को रक्षा क्षेत्र के आयात के लिए 50 करोड़ डॉलर का क़र्ज़ रियायती दरों पर दिया था.

जून 2020 में कोविड-19 महामारी के आर्थिक झटकों से उबरने में बांग्लादेश की मदद के लिए चीन ने बांग्लादेश में बने लगभग 97 प्रतिशत उत्पादों पर से आयात शुल्क हटा लिया था.

क्या बांग्लादेश क्वाड का हिस्सा बनेगा?

क्वाड में शामिल होने के सवाल को लेकर अगर हम बांग्लादेश की हालिया प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण करें, तो ऐसा लगता है कि बांग्लादेश अपनी गुट-निरपेक्षता वाली संतुलित विदेश नीति के रास्ते पर ही चलता रहेगा. भारत ने भी यही कहा है कि अभी क्वाड के विस्तार को लेकर कोई बातचीत नहीं चल रही है.

मीडिया की ख़बरों की मानें, तो क्वाड को लेकर चीन के रक्षा मंत्री वेई फेंघे द्वारा जताई गई उम्मीदों या अपेक्षाओं पर बांग्लादेश के राष्ट्रपति अब्दुल हामिद ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी. इस बीच, चीन ने बांग्लादेश के साथ संबंधों को और मज़बूती देने की कोशिशें तेज़ कर दी हैं. अप्रैल में वेई फेंघे ने ढाका के बंगबंधु म्यूज़ियम का दौरा किया था.

चीन के किसी उच्च स्तर के पदाधिकारी का शेख़ मुजीबुर रहमान को श्रद्धांजलि देने के लिए म्यूज़ियम जाने का ये पहला दौरा था. चीन के रक्षा मंत्री का म्यूज़ियम दौरा, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उसी संग्रहालय में जाने के एक महीने बाद हुआ था.

चीन के सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म वीचैट में 13 मई को आए एक अनाम लेख में कहा गया था कि, 'हमारे राजदूत ने बांग्लादेश को अच्छी नीयत से ही आगाह किया था. अगर बांग्लादेश ये सोचता है कि वो चीन और अमेरिका के टकराव से फ़ायदा उठा सकता है, तो ये उसके बचकानेपन को दिखाता है. इससे पता चलता है कि बांग्लादेश ने दो बड़ी शक्तियों के बीच संघर्ष की निर्ममता को बहुत कम करके आंका है'.

इस लेख में बांग्लादेश को कोविड-19 के दौरान चीन से मिली मदद की भी याद दिलाई गई थी.

फिलहाल तो बांग्लादेश को किसी चीन विरोधी मंच का हिस्सा बनने की ज़रूरत नहीं है. लेकिन चीन की चेतावनी ये इशारा देती है कि वो बांग्लादेश से कह रहा है कि वो दुनिया में बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए, गुट-निरपेक्षता के अपने रुख़ को छोड़कर चीन को अपना पक्का साथी बना ले, जिससे विश्व स्तर पर अमेरिका का सामना किया जा सके.