सेप्टेज प्रबंधन गंगा से सटे 14 अन्य शहरों में भी होगा

राष्ट्रीय नदी गंगा की स्वच्छता एवं निर्मलता पर राज्य सरकार का खास फोकस है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सोमवार को दिल्ली में केंद्रीय शहरी विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हरदीप पुरी से मुलाकात के दौरान स्वच्छ भारत मिशन 2.0 में गंगा से सटे 14 अन्य शहरों के लिए सेप्टेज प्रबंधन की योजनाओं की स्वीकृति 90 फीसद केंद्रांश के साथ करने का आग्रह किया। उन्होंने मिशन में राज्य के लिए प्रस्तावित की जाने वाली योजनाओं में भी केंद्रांश यही रखे पर जोर दिया।

गंगा से सटे 15 शहरों से गंदगी किसी भी दशा में गंगा में न जाए, इसके लिए वहां नमामि गंगे के साथ ही अमृत योजना के तहत सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और नालों की टैपिंग का कार्य लगभग अंतिम चरण में है। इसके सकारात्मक नतीजे आए हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़े बताते हैं कि ऋषिकेश तक गंगा जल की गुणवत्ता ए श्रेणी की है। साथ ही हरिद्वार में भी गुणवत्ता में निरंतर सुधार हुआ है। इस सबके मद्देनजर मुख्यमंत्री ने गंगा से सटे 14 अन्य नगरीय क्षेत्रों में सेप्टेज प्रबंधन की योजनाओं में केंद्र से मदद का आग्रह किया है। सेप्टेज प्रबंधन के तहत शौचालयों का निर्माण कर इन्हें 30 मीटर के भीतर उपलब्ध सीवर लाइन से जोड़ा जाता है। सीवर लाइन के अभाव में शौचालय को दो गड्ढों अथवा ओएसएस (आनसाइट सेनिटेशन सिस्टम) से जोड़ा जाता है। दिल्ली प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री रावत ने केंद्रीय शहरी विकास राज्यमंत्री हरदीप पुरी से आग्रह किया कि स्वच्छ भारत मिशन 2.0 में राज्य के लिए प्रस्तावित योजनाओं में केंद्रांश 90 फीसद रखा जाए। उन्होंने यह भी कहा कि मिशन में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन योजना के लिए 35 फीसद वायबिलिटी गैप फंडिंग केंद्रांश के रूप में अनुमन्य है। राज्य की कठिन परिस्थितियों और सीमित संसाधनों को देखते हुए इसे 90 फीसद करने पर विचार किया जाना आवश्यक है।

लीगेसी वेस्ट के प्रस्ताव भी हों अनुमोदित

मुख्यमंत्री ने शहरी क्षेत्रों में वर्षों से जमा लीगेसी वेस्ट (पुराना प्रत्यक्त कूड़ा) की समस्या की तरफ भी केंद्रीय मंत्री का ध्यान खींचा। आग्रह किया कि एक लाख से कम जनसंख्या वाले शहरों के लीगेसी वेस्ट के प्रस्तावों को भी स्वच्छ भारत मिशन में अनुमोदित किया जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य के शहरों में निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन के प्लांट स्थापित किए जाने आवश्यक हैं। प्रथम चरण में सभी जिला मुख्यालयों व नगर निगमों में ये प्लांट लग सकते हैं। मुख्यमंत्री ने इसके लिए स्वच्छ भारत मिशन या केंद्र पोषित विशेष योजना के तहत धनराशि स्वीकृत करने का भी अनुरोध किया।

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