युवाओं की योगी सरकार की मुहिम से खेती किसानी में बढ़ी रुचि

लखनऊ । उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना की मुहिम अब सफलता की सीढ़ियां चढ़ने लगी है। खेती किसानी से विमुख हो चुके किसानों की नई खेप का इस ओर झुकाव होने लगा है। वजह कृषि पढ़ने वालों छात्रों को योगी सरकार की ओर से मिलने वाली छात्रवृत्ति न सिर्फ उनकी शिक्षा पूरी कर रही है बल्कि खेती किसानी के प्रति उनमें रुचि भी पैदा कर रही है।

किसानों की सबसे बड़ी संस्था कृषि उत्पादन मंडी परिषद द्वारा कृषि विश्वविद्यालय, महाविद्यालयों में किसानों के बच्चों को पढ़ाई के लिए दी जा रही मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना के चलते यह बदलाव आया है। किसानों के बच्चे इसमें रूचि ले रहे हैं। कृषि में पढ़ने वाले छात्रों को स्वाइल टेस्टिंग, खाद-बीज की मात्रा के साथ आधुनिक खेती से पारंगत किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना के तहत कृषि विश्वविद्यालय और कृषि महाविद्यालय में पढ़ने वाले किसानों के बच्चों को तीन हजार रूपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति के रूप में दिए जाते हैं। पहले इस योजना के बारे में किसानों को जानकारी नहीं थी, जिसके चलते किसान अपने बच्चों को इस योजना का लाभ नहीं दिलवा पाते थे। जिसकी जानकारी होने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस योजना का प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया। आज राज्य के तमाम कृषि विश्वविद्यालय तथा कृषि महाविद्यालय में कृषि स्नातक, होम साइंस स्नातक, कृषि सन्नातकोत्तर, होम साइंस स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रहे किसान के सैकड़ों बच्चों को छात्रवृत्ति मिल रही है।

छात्रवृत्ति योजना के तहत मंडी परिषद ने कृषि विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे किसानों के 2,690 बच्चों को वर्ष 2017 से अब तक 9़91 करोड़ रूपये छात्रवृत्ति के रुप में दिए हैं। इसके साथ ही मंडी परिषद तीन कृषि विश्वविद्यालयों में छात्रों के लिए छात्रावास भी बनवा रहा है। किसानों के बच्चों की पढ़ाई के लिए राज्य में ही इस तरह की पहल शासन ने की है। मंडी परिषद द्वारा किसानों के बच्चों की पढ़ाई को लेकर उठाये जा रहे ऐसे कदमों के चलते ही सूबे के किसान अब अपने बच्चों को कृषि विश्वविद्यालयों में पढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।

इसकी मुख्य वजह मुख्यमंत्री कृषक कल्याणकारी योजनाओं के तहत संचालित मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना को माना जा रहा है। कृषक कल्याणकारी योजनाओं में मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना सहायता योजना, मुख्यमंत्री खेत-खलिहान अग्निकांड दुर्घटना सहायता योजना, मुख्यमंत्री कृषक उपहार योजना तथा मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना शामिल है।

इस योजना का लाभ पा रहे प्रदीप वर्मा, जो कृषि से एमएससी कर रहे हैं, ने बताया कि उन्हें सलाना 36 हजार रूपये मिलते हैं। जिससे पढ़ाई भी होती है। घर से सहयोग भी नहीं लेना पड़ता है। यह योजना हमें आत्मनिर्भर बनाने के गुर सिखाती है।

दूसरे छात्र प्रभाकर राव ने बताया कि मुख्यमंत्री छात्रवृत्ति योजना के कारण हमारी पढ़ाई सुचारू ढंग से चल रही है। यह गरीब बच्चों के लिए वरदान है। इससे बच्चे स्वयं पर निर्भर रहते हैं।

मंडी परिषद के अपर निदेशक, प्रशासन, कुमार विनीत कहते हैं कि मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना के तहत वर्ष 2017-18 से अब तक कृषि विश्वविद्यालय तथा कृषि महाविद्यालय में पढ़ रहे किसानों के 2,690 बच्चों को 9़91 करोड़ रुपये छात्रवृत्ति के रूप में दिए गए हैं। जिसमें वित्तीय वर्ष 2020-21 में बीते महीने तक 1.40 करोड़ रूपये 368 छात्रों को छात्रवृत्ति के रुप में दिए गए। इस अलावा मंडी परिषद कृषि विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे छात्रों के रहने की उचित व्यवस्था करने के लिए चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर, नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय अयोध्या तथा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय बांदा में कृषक छात्रावास का निर्माण करा रहा है। इन तीन छात्रावासों के निर्माण में 20.12 करोड़ की लागत आ रही है। प्रत्येक छात्रवास में 50 कमरे होंगे और उनमें 100 छात्र रह सकेंगे।

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