मुक्केबाजों ने इस साल सीमित खेल गतिविधियों के बीच मारा नॉक आउट पंच

नई दिल्ली| साल 2020 में खेल जगत में ओलंपिक से जुड़ी खबरों का बोलबाला होने की उम्मीद थी, लेकिन सुर्खियों में रहे महामारी, स्थगित, खाली स्टेडियम, अनिश्चितता और हाल ही में आया वैक्सीन जैसा शब्द, क्योंकि कोरोनावायरस ने लोगों को घरों में, क्वारंटीन सेंटर, स्पोर्ट्स फैसिलिटी व हॉस्टलों में रहने को मजबूर कर दिया। मार्च में विश्व स्वास्थय संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोविड-19 को महामारी घोषित कर दिया था। इसके बाद 24 जुलाई से शुरू होने वाले टोक्यो ओलंपिक खेलों को अगले साल 23 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया गया। 25 मार्च को भारतीय सरकार ने पूरे देश में तालाबंदी की घोषणा कर दी थी, जिसने स्पोर्ट्स कैलेंडर को रोक दिया था। ओलंपिक स्पोर्ट्स में जो कुछ अहम हुआ वो इससे पहले हुआ।

ओलंपिक स्पोर्ट्स की सबसे बड़ी खबर भारत का एशियाई मुक्केबाजी क्वालीफायर में शानदार प्रदर्शन रहा। यह क्वालीफायर वैसे तो चीन के वुहान में खेले जाने थे, लेकिन कोविड की जन्मस्थली होने के कारण क्वालीफायर्स को चीन की जगह जोर्डन के अम्मान में कराने का फैसला किया गया।

भारत ने क्वालीफायर में नौ कोटा हासिल किए और अपने पुराने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को पीछे कर दिया। भारत ने 2012 लंदन ओलंपिक में आठ कोटा हासिल किए थे। विश्व चैम्पियन मैरी कॉम (51 किलोग्राम भारवर्ग) उन मुक्केबाजों में रहीं, जिन्होंने कोटा हासिल किया।

निकहत जरीन के साथ विवादों के बाद ओलंपिक कांस्य पदक विजेता ने क्वालीफायर खेलने के लिए ट्रायल दी, जिसमें निकहत को मात देते हुए क्वालीफायर में पहुंचीं।

मैरी कॉम के अलावा महिला वर्ग में पूजा रानी (75 किलोग्राम भारवर्ग), सिमरनजीत कौर (60 किलोग्राम भारवर्ग), लवलीना बोरगोहेन (69 किलोग्राम भारवर्ग) ओलंपिक कोटा हासिल करने वाली अन्य मुक्केबाज रहीं। मनीष कौशिक (63 किलोग्राम भारवर्ग) अमित पंघल (52 किलोग्राम भारवर्ग), आशीष कुमार (75 किलोग्राम भारवर्ग), सतीश कुमार (प्लस 91 किलोग्राम भारवर्ग) और विकास कृष्णन (69 किलोग्राम भारवर्ग) ने पुरुष वर्ग में भारत को ओलंपिक कोटा दिलाया।

भारत अभी भी नौ और कोटा हासिल कर सकती है। हालांकि कोविड के कारण ओलंपिक क्वालीफायर आयोजित कराने में देरी हो रही है।

बैडमिंटन में भारत की दो शीर्ष महिला खिलाड़ियों- सायना नेहवाल और पीवी सिंधु ने साल का अंत मार्च में ऑल इंग्लैंड ओपन टूर्नामेंट में खेलेत हुए किया।कोविड के कारण बाकी के साल में इन दोनों ने कोर्ट पर कदम नहीं रखा। मौजूदा विश्व विजेता सिंधु और 2019 विश्व चैम्पियनशिप में रजत पदक जीतने वाले साई प्रणीत ने ओलंपिक कोटा हासिल किया। सायना और पुरुष रैंकिंग में पूर्व विश्व नंबर-1 स्थान पर रह चुके किदाम्बी श्रीकांत दोनों अपनी रैंकिंग सुधारने की कोशिश में थे, इसलिए ओलंपिक के स्थगित होने से इन दोनों को अपनी मानसिक और शारीरिक क्षमता को मजबूत करने का मौका मिल गया।

महामारी के कारण लेग ब्रेक से पहले श्रीकांत की फॉर्म लड़खड़ा रही थी, लेकिन अक्टूबर में डेनमार्क ओपन से जब उन्होंने वापसी की तो ऐसा लग रहा था कि वह 2017 की अपनी फॉर्म के काफी करीब हैं। क्वार्टर फाइनल में हालांकि विश्व के नंबर-2 चोय टिएन चेन ने उन्हें कड़े मुकाबले में हरा दिया।

सिंधु ने इस बीच साल का अंत आते-आते ट्रेनिंग के लिए इंग्लैंड जाने का फैसला किया। वह अब सायना, प्रणीत, श्रीकांत और युगल मुकाबलों की विशेषज्ञ अशिवन पोनप्पा, एन. सिक्की रेड्डी, चिराग शेट्टी, सात्विकसाइराज रैंकीरेड्डी, के साथ अगले साल जनवरी में थाईलैंड में होने वाले बी डब्ल्यूएफ टूर्नामेंट्स में वापसी करेंगी। बैडमिंटन का क्वालीफिकेशन कैलेंडर इंडियन ओपन के साथ खत्म हो सकता है जो 11 से 16 मई के बीच खेला जाएगा।

ट्रैक एंड फील्ड में नीरज चोपड़ा भारत की पदक जीतने की सबसे बड़ी उम्मीद हैं। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में अपने पहले ही प्रयास में टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर लिया था। चोपड़ा ने इससे पहले 2018 में एशियाई खेलों में हिस्सा लिया था और स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद वह कोहनी की चोट के कारण बाहर थे।

साल 2019 का अंत कुश्ती में कई अच्छी खबरों के साथ हुआ था और इस साल की शुरुआत भी अच्छी खबरों से हुई थी। नई दिल्ली में एशियाई चैम्पियनशिप की मेजबानी की गई थी। कोविड-19 ने इस टूर्नामेंट पर भी प्रभाव डाला, क्योंकि चीन के खिलाड़ियों को हिस्सा लेने से रोक दिया गया। साथ ही उत्तरी कोरिया तथा तुर्कमेनिस्तान ने अपने देशों में इस महामारी के फैलने से टूर्नामेंट से नाम वापस ले लिया। इसके बाद महामारी के चलते सब कुछ रुक गया। साल के अंत में दिसंबर में खिलाड़ियों ने मैट पर वापसी की और सर्बिया के बेलग्रेड में इंडीविज्यूअल विश्व कप में हिस्सा लिया।

एशियाई खेलों को स्वर्ण पदक विजेता बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट ने इस विश्व कप में हिस्सा न लेने का फैसला किया। विनेश ट्रेनिंग के लिए हंगरी गई हैं और बजरंग अमेरिका में तीन जनवरी तक ट्रेनिंग करेंगे। बजरंग ने टेक्सास में फ्लो रेसलिंग चैलेंज में भी हिस्सा लिया था जहां उन्होंने दो बार के विश्व विजेता जेम्स ग्रीन को मात दी थी।

टेनिस में भारत की ओर से सुमित नागल ने बड़ी सफलता हासिल की वहीं स्टार महिला खिलाड़ी सानिया मिर्जा ने बच्चे के जन्म के बाद दो साल बाद वापसी की। नागल ने अमेरिका ओपन में अमेरिका के ब्रैडले क्हान को पहले दौर में मात दे इतिहास रचा। वह बीते सात साल में किसी ग्रैंड स्लैम के मुख्य दौर में एकल मैच जीतने वाले भारत के पहले खिलाड़ी बने। दूसरे दौर में नागल को आस्ट्रिया को डॉमिनिक थीम ने मात दी जो बाद में जाकर चैम्पियन बने।

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