एनएससीएन-के ने घोषणा की संघर्ष विराम की, चाहता है शांति वार्ता

कोहिमा । नगा विद्रोही समूह एनएससीएन-के ने पांच साल से अधिक समय के बाद संघर्ष विराम की घोषणा की और शांति वार्ता शुरू करने के लिए केंद्र सरकार के अधिकारियों से संपर्क किया है। नगालैंड सरकार ने पिछले सप्ताह केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) की एक अधिसूचना को अधिसूचित किया था, जिसमें एनएससीएन (के), उसके सभी गुटों और सहयोगी संगठनों को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धाराओं के तहत गैरकानूनी संघ घोषित किया गया था।

खूंखार उग्रवादी निकी सुमी के नेतृत्व में नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड या एनएससीएन (के) के खापलांग गुट ने अपने बयान में कहा कि उसे उम्मीद है कि भारत सरकार नगालैंड और नगा लोगों में शांति के व्यापक हितों में विश्वास बहाली के उपाय के रूप में हमारे फैसले का सम्मान करके सकारात्मक जवाब देगी ।

बयान में कहा गया है कि इस प्रक्रिया को सुगम बनाने और नगा लोगों विशेष रूप से नगा नागरिक समाज संगठनों और गैर सरकारी संगठनों की इच्छा को ध्यान में रखते हुए एनएससीएन-के ने 2015 में संघर्ष विराम के एकतरफा निराकरण के पहले के फैसले को रद्द करते हुए तत्काल प्रभाव से संघर्ष विराम फिर से लागू करने का फैसला किया है।

एनएससीएन-के नागा मुद्दे का सम्मानजनक और स्वीकार्य राजनीतिक समाधान हासिल करने के लिए इन सभी वर्षों में प्रयासरत रहा है। एनएससीएन-के इस लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे के शीघ्र समाधान के लिए नगा लोगों के बीच भारी भावनाओं के प्रति भी सचेत है।

जारी बयान में कहा गया है कि एनएससीएन-के को सभी हितधारकों के शामिल होने के साथ नगा मुद्दे का अंतिम और स्थायी समाधान निकालने के लिए पिछले दिनों केंद्र सरकार द्वारा किए गए गंभीर और वास्तविक प्रयासों की जानकारी है।

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