हमारे गेंदबाजों में बाउंसर का जवाब बाउंसर से देने का माद्दा: सुनील गावस्कर

नई दिल्ली। भारतीय टीम एक संपूर्ण सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलिया दौरे पर है। ऐसे में भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर को भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण पर पूरा भरोसा है। वह मानते हैं कि भारतीय गेंदबाज अब बाउंसर का जवाब बाउंसर से देते हैं। ऑस्ट्रेलिया दौरे से जुडे़ तमाम मुददों पर सुनील गावस्कर ने खुलकर बातचीत की…

– ऑस्ट्रेलियाई टीम इस समय फॉर्म में है। वह शीर्ष टीम लग रही है, उनके सारे खिलाड़ी आ गए हैं, जो भारत के खिलाफ पिछली सीरीज में नहीं थे। आप इस बार के मुकाबले को कैसे देख रहे हैं?

  • भारत-ऑस्ट्रेलिया की सीरीज हमने जो देखी है, अगर आप 1977 से देखें तो पता चलेगा कि बड़े नजदीकी मामले होते हैं। इस साल भी वैसा ही होगा। यह नजदीकी मामला होगा। दोनों टीम के पास संतुलन है। ऑस्ट्रेलिया दो साल से थोड़ा मजबूत हो गई है। उनकी टीम में डेविड वार्नर और स्टीव स्मिथ आ गए हैं। मार्नस लाबुशाने ने काफी प्रगति की है। मैं समझता हूं कि यह दिलचस्प सीरीज होगी।

– कोविड-19 चल रहा है। अभी क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के लिए मुसीबत बन गया है कि पहला टेस्ट कहां करे? अधिकतर ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी लंबे समय से बायो-बबल में थे। पहले इंग्लैंड दौरा, फिर यूएई में आइपीएल और अब भारत के साथ सीरीज। पहले भारत जब जाता था तो स्लेजिंग का सामना करना पड़ता था। अब बायो-बबल का अलग मानसिक तनाव हो गया है। आप कैसे देखते हैं?

  • यह एक न्यू नॉर्मल हो जाएगा। दो साल तक ऐसा ही होगा। टीम को बबल में रहना होगा, क्योंकि टीम बबल में ही सबसे सुरक्षित है। अगर आपके पास अच्छी टीम है। आपकी टीम में ऐसे खिलाड़ी हों जो मस्ती, शरारत करें, तो टीम को मानसिक तनाव नहीं होगा। ऐसे में यह दो महीने आसानी से निकल जाएंगे। आइपीएल के दौरान हमारी कमेंटटर टीम प्रोडयूसर से अलग थी। हमारी यूनिट अलग थी और यह दो महीने फटाफट चले गए। अगर ऐसा ही रहेगा तो बबल का समय आसानी से निकल जाएगा। हां, इतना जरूर है यह आसान नहीं होगा। आप दोस्त से नहीं मिल सकते, बाहर खाना नहीं खा सकते। होटल के रेस्तरां का ही इस्तेमाल करना पड़ेगा। जैसा मैंने कहा टीम अच्छी हो तो आसानी से समय बीत जाएगा। कमेंटेटर के तौर पर मुझे भी मुश्किल होगी, लेकिन कुछ महीनों में इसकी आदत हो जाएगी।

– विराट एक ही टेस्ट खेलेंगे, फिर वह निजी कारणों से वापस आ जाएंगे, तो ऑस्ट्रेलिया के पास बड़ा मौका है? भारत घर से बाहर डे-नाइट टेस्ट नहीं खेला है। यह भी दबाव बढ़ाएगा। क्या हम टेस्ट सीरीज शुरू होने से पहले ही 0-1 से शुरुआत करेंगे?

  • भारतीय टीम की गेंदबाजी पिछले तीन से चार सालों में जिस तरह की हुई है तो हम किसी भी टीम को जल्दी आउट कर सकते हैं। हमारे पास इशांत शर्मा हैं, मुहम्मद शमी हैं। यह दिग्गज गेंदबाज हैं। गुलाबी गेंद का इस्तेमाल तो हमारे गेंदबाजों ने कोलकाता में बांग्लादेश के खिलाफ शानदार ढंग से किया था तो ऐसा ही कुछ हम वहां कर सकते हैं। हां, गुलाबी गेंद के टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया ने जीत हासिल की हैं, लेकिन कभी वह हार भी सकते हैं। मैं नहीं मानता हूं कि गुलाबी गेंद की वजह से टीम के लिए हालात मुश्किल हो जाएंगे, हां थोड़ी कठिनाई जरूर होगी। भारतीय टीम के पास काबिलियत है कि वह इन मुश्किल हालात से सामजस्य बैठा सके।

– विराट पहला टेस्ट खेलकर वापस लौट आएंगे। रोहित वहां होंगे, तो आपको क्या लगता है कि किसे कप्तानी करनी चाहिए?

  • उप कप्तान तो अजिंक्य रहाणे हैं। जब कोई कप्तान नहीं है तो उप कप्तान ही कप्तान बन जाता है। रहाणे कप्तान बनेंगे, क्योंकि चयनकर्ताओं ने उन्हें पहले ही उप कप्तान बना दिया है। हां, विराट की गैरमौजूदगी ऑस्ट्रेलिया के लिए अच्छी बात हो गई है, लेकिन हमारी टीम में केएल राहुल और रोहित आ जाएंगे। रोहित ओपनिंग में अच्छी शुरुआत दिला सकते हैं। वहीं, मयंक अग्रवाल ने जिस तरह से पिछले ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर बल्लेबाजी की थी, तो इन खिलाडि़यों के टीम में रहने से लगता है कि भारतीय टीम के पास काबिलियत है। रोहित को ओपनिंग ही करनी चाहिए। वह तीनों प्रारूपों में अब ओपनिंग ही कर रहे हैं। अब आगे क्या रणनीति बनेगी वह बाद की बात है।

– रोहित की चोट को लेकर काफी विवाद रहा। टीम चयन के समय चयनकर्ताओं ने कहा रोहित फिट नहीं है, लेकिन वह उसी दिन अभ्यास मे उतर गए। क्या इस विवाद को अच्छे से संभाला जा सकता था?

  • अब इस बारे में बात करने का कोई फायदा नहीं है क्योंकि यह बीती बात हो गई है। अभी हमें ऑस्ट्रेलिया दौरे के बारे में सोचना है। अभी रोहित बेंगलुरु चले गए हैं। हम यही आशा करते हैं कि वह 100 प्रतिशत फिट होंगे और भारत को फायदा ही होगा।

– अगले दो विश्व कप को लेकर किस तरह तैयारी करनी चाहिए? रोहित जिस तरह आइपीएल में सबसे सफल कप्तान बनकर उभरे हैं, तो क्या उन्हें भारत की टी-20 टीम की कप्तानी सौंपी जानी चाहिए?

  • यह सवाल तो चयन समिति के प्रमुख सुनील जोशी से पूछना चाहिए। वैसे भी विश्व कप तो बहुत आगे की बात है। पहले हमें ऑस्ट्रेलिया की सोचनी होगी। हमें कोविड-19 की वजह से आगे की सोचने में डर लगता है। कल की सोच सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया दौरा है तो पहले उसके बारे में सोचें। फिर जो फैसला लिया जाएगा वह बाद की बात होगी।

– लंबे दौरे पर गेंदबाजों के कार्य प्रबंधन की बात हो रही है। माना जा रहा है कि शमी या बुमराह में से किसी एक को सीमित ओवर सीरीज में आराम दिया जाए। आपका क्या सोचना है?

  • हां हो सकता है। अगर आपका लक्ष्य टेस्ट सीरीज है तो फिर यह रोटेशन करेंगे तो टीम के लिए अच्छा होगा। भारतीय टीम के पास दूसरे ऐसे गेंदबाज हैं, जिनके पास काबिलियत है। उमेश यादव 50 ओवर क्रिकेट में अच्छा करते हैं। हालांकि टी-20 में वह इतने सफल नहीं है। मुझे लगता है कि अगर हार्दिक पांड्या गेंदबाजी करेंगे तो बुमराह और शमी के कंधों का बोझ हल्का हो जाएगा। अगर 10 ओवर नहीं चार पांच भी करेंगे, तो यह इन दोनों तेज गेंदबाजों के लिए काफी फायदेमंद होगा।

– कुछ लोग आपकी हिंदी कमेंट्री पसंद कर रहे हैं और कुछ हैं जिन्हें आपकी कमेंट्री पसंद नहीं आ रही है। आपका क्या कहना है?

  • अब ऐसा तो होगा ही कुछ पसंद करते हैं और कुछ नापसंद करते हैं। अगर मुझे पता चले कि क्या अच्छा नहीं लगता है तो उसको मैं सुधारने की कोशिश करूंगा।

– इंटरनेट मीडिया के आने की वजह से क्या आपको लगता है कि अब कमेंटेटर की टिप्पणी को भी गलत तरीके से पेश किया जाता है। अगर आप संजय मांजरेकर को ही लें तो उन्हें खिलाड़ी की शिकायत के बाद कमेंट्री पैनल से निकाल दिया गया?

 

  • आप यह कह रहे हैं कि खिलाडि़यों की शिकायत की वजह से कमेंट्री टीम से निकाला गया, क्या आपको अधिकारिक रूप से किसी ने बताया है या फिर यह चाय के साथ हुई चर्चा से उपजी हवाहवाई बात है। अधिकारिक तौर पर जब तक कुछ नहीं कहा जाता तो इस पर कैसे यकीन किया जाए। कई बार खिलाड़ी के कंधों पर रखकर भी गोली चलाई जाती है। मुझे लगता है कि पहले सही से समझने के बाद कोई भी टिप्पणी की जानी चाहिए।

– आपने अभी तक जितना क्रिकेट देखा है तो क्या आपको लगता है यह भारत का सर्वश्रेष्ठ आक्रमण है?

  • जी बिल्कुल, तीन तेज गेंदबाज अलग शैली, अलग ताकत ऐसा बहुत कम दिखा है। पहले कपिल देव, मदन लाल, करसन घावरी। थे। देव स्विंग करते थे और उनकी बाउसंर भी बेहतरीन थी। मदन और घावरी भी अच्छे गेंदबाज थे, उनके पास गति नहीं थी। आज इशांत, बुमराह और शमी तेज गेंदबाजी कर सकते हैं। उमेश भी तेज गेंदबाजी कर सकते हैं। फायटिंग फायर विद फायर, हमारे पास भी ऐसे गेंदबाज हैं जो बाउंसरों का जवाब बाउंसर से देने का माद्दा रखते हैं। यह मैंने तो पहली बार होते देखा है। 1930 के दौर में कभी होता था, जब मुहम्मद निसार जैसे गेंदबाज थे, लेकिन अभी कुछ आठ से 10 सालों में मैंने पहली बार ऐसा देखा है।

 

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