सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश, नीतीश कैबिनेट में सभी वर्गों का रखा ध्‍यान

पटना। Bihar Govt. Oath Ceremony बिहार में सातवीं बार मुख्यमंत्री बनने वाले नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने अपने 15 सदस्यीय मंत्रिमंडल के गठन में बिहार की जातिगत सामाजिक व्यवस्था का ध्यान रखा है। कहा जा सकता है कि इंजीनियरिंग की शिक्षा ग्रहण करने वाले नीतीश कुमार ने मंत्रिमंडल में ‘सोशल इंजीनियरिंग’ (Social Engineering) को बेहतर तरीके से साधने की कोशिश की है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी वैश्य बिरादरी से तार किशोर प्रसाद (Tar Kishore Prasad) और नोनिया जाति से रेणु देवी (Renu Devi) को उपमुख्यमंत्री (Deputy CM) बनाकर बड़ा सियासी दांव खेला है। हालांकि, पहले मंत्रिमंडल में कई ऐसे चर्चित नेताओं को जगह नहीं मिल पायी है, जिनकी जगह पक्की होने की काफी चर्चा थी। बाद में नीतीश मंत्रिमंडल का विस्तार होगा तब उनको शपथ दिलाए जाने की संभावना है।

हर जाति-वर्ग को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश

राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नीतीश मंत्रिमंडल (Nitish Cabinet) में हर जाति-वर्ग को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है, ताकि अवाम के बीच नई सरकार के गठन के बारे में सही-सही संदेश जाए। नये मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री जहां अकेले कुर्मी जाति का प्रतिनिधित्व करते हैं तो वहीं भूमिहार एवं यादव जाति से दो-दो मंत्री बनाए गए हैं। इसमें जनता दल यूनाइटेड (JDU) कोटे से विजय कुमारी चौधरी और बीजेपी कोटे से जीवेश मिश्रा भूमिहार जाति से आते हैं। इसी तरह जेडीयू ने यादव जाति से आने वाले बिजेंद्र प्रसाद यादव और बीजेपी ने रामसूरत राय को मंत्री बनाया है।

नए मंत्रिमंडल में महादलित वर्ग से तीन मंत्री

नए मंत्रिमंडल में महादलित वर्ग से तीन मंत्री बनाए गए हैं। इनमें जेडीयू कोटे से पासी जाति के अशोक चौधरी, हिंदुस्‍तानी अवाम मोर्चा (HAM) कोटे से मुसहर जाति से संतोष सुमन और बीजेपी कोटे से दुसाध जाति के रामप्रीत पासवान मंत्री बनाए गए हैं। जेडीयू ने कुशवाहा जाति से मेवालाल चौधरी और धानुक जाति से शीला कुमारी को मंत्री बनाया है तो बीजेपी ने ब्राह्मण जाति से मंगल पाण्डेय और राजपूत जाति से अमरेंद्र प्रताप सिंह को मंत्री बनाया है। जबकि, विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी मंत्री बनाए गए हैं जो निषाद जाति से आते हैं।

दूसरे विस्तार में और मजबूत होगा सामाजिक समीकरण

जेडीयू के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि नीतीश मंत्रिमंडल के दूसरे विस्तार में सामाजिक समीकरण को और मजबूत करने के लिए निषाद, चंद्रवंशी व मुस्लिम बिरादरी को प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है। अभी  सामाजिक व जातिगत समीकरण को साधने का पूरा प्रयास करने के बाद भी जातिगत समीकरण का खाका सही ढंग से फिट नहीं हो पाया, क्योंकि अतिपिछड़े वर्ग को न तो जनसंख्यानुपात कोटा मिला और न ही मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व। सामाजिक न्याय व प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर बिहार के पिछड़े-अतिपिछड़े काफी जागरूक हुए हैं।

 

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