26 अक्टूबर से 14 नवंबर तक चलने वाले अभियान के लिए आदेश जारी

जयपुर । मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्देश पर 26 अक्टूबर सेे प्रदेशभर में मिलावटखोरी के खिलाफ शुरू होने वाले ’शुद्ध के लिए युद्ध’ अभियान के बेहतर संचालन एवं माॅनिटरिंग के लिए राज्य स्तर पर कोर ग्रुप गठित किया गया है। यह गु्रप अभियान की जिला स्तरीय प्रबंधन समितियों तथा स्थानीय जांच दलों की निगरानी और समन्वय करेगा। मुख्य सचिव श्री राजीव स्वरूप ने इसके लिए आदेश जारी कर दिए हैं।
मुख्य सचिव द्वारा जारी आदेश के अनुसार, इस अभियान की अवधि 26 अक्टूबर से 14 नवंबर तक रहेगी। ’शुद्ध के लिए युद्ध’ अभियान के दौरान, दूध, मावा, पनीर, मिठाइयों, दूध से बने अन्य उत्पादों, आटा, बेसन, खाद्य तेल एवं घी, सूखे मेवे, मसालों, अन्य खाद्य पदार्थों तथा बाट एवं माप की जांच को प्राथमिकता दी जाएगी।

संचालन, प्रबंधन एवं प्रबोधन हेतु वरिष्ठ अधिकारियों का कोर ग्रुप

राज्य व्यापी अभियान के सुचारू संचालन, प्रबंधन एवं प्रबोधन हेतु राज्य स्तर पर गठित कोर गु्रप में गृह तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभागों के प्रमुख शासन सचिव और खाद्य एवं आपूर्ति तथा पशुपालन एवं डेयरी विभागों के शासन सचिव शामिल हैं। यह कोर गु्रप जिला स्तरीय प्रबंधन समितियों एवं जिला कलेक्टर से निरंतर संपर्क रखकर अभियान की अवधि में खाद्य पदार्थों में मिलावट कर प्रदेशवासियों की सेहत से खिलवाड़ करने वाले खाद्य-पदार्थ उत्पादकों, थोक विक्रेताओं और बड़े खुदरा विक्रेताओं के विरूद्ध मौके पर ही सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। साथ ही अभियान के संदर्भ में विधिक कार्यवाही की लगातार माॅनिटरिंग कर अपराधियों और मिलावटखोरों को सजा दिलवाना सुनिश्चित करेगा।

कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय प्रबंधन समिति गठित

अभियान के लिए जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय प्रबंधन समिति गठित की गई हैं। इस समिति में जिला पुलिस अधीक्षक, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ), जिला रसद अधिकारी प्रबंध निदेशक जिला डेयरी, उप विधि परामर्शी तथा अतिरिक्त जिला कलेक्टर स्तर के अधिकारी शामिल हैं। समिति ऐसे खाद्य-पदार्थ उत्पादकों, थोक विक्रेताओं और बड़े खुदरा विक्रेताओं को चिन्हित करेगी जिनके यहां मिलावट की संभावना अधिक होे। समिति द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची के अनुसार जिले में अभियान के तहत गठित जांच दलों द्वारा जांच की कार्यवाही की जाएगी। समिति दैनिक आधार पर जांच के लिए संग्रहित किए गए नमूनों, उनकी टेस्टिंग रिपोर्ट मौके पर नष्ट की गई सामग्री, दर्ज की गई एफआईआर की कार्यवाही की समीक्षा भी करेगी। समिति द्वारा दिन भर की कार्यवाही रिपोर्ट राज्य स्तरीय नियंत्रण कक्ष को भेजी जाएगी।

उपखण्ड अधिकारी, विकास अधिकारी अथवा तहसीलदार करेंगे जांच दल का नेतृत्व

आदेश के अनुसार, ’शुद्ध के लिए युद्ध’ अभियान के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों का एक संयुक्त दल बनाया जाएगा। इस जांच दल का नेतृत्व उपखण्ड अधिकारी अथवा विकास अधिकारी, तहसीलदार अथवा राज्य प्रशासनिक सेवा के अन्य अधिकारी करेंगे। पुलिस उपाधीक्षक अथवा पुलिस निरीक्षक, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, प्रवर्तन अधिकारी, विधिक माप विज्ञान अधिकारी और डेयरी के प्रतिनिधि दल के सदस्य होंगे। प्रत्येक जिले कलेक्टर आवश्यकतानुसार जांच दलों की संख्या का निर्धारण करेंगे।
जांच दल जिला कलेक्टर द्वारा निर्धारित संस्थाओं निरीक्षण कर नमूने लेंगे तथा निकटस्थ फूड टेस्टिंग लैब में नमूनों की जांच करवाकर मौके पर कठोर विधिक कार्यवाही सुनिश्चित करेंगे। प्रतिदिन कार्यवाही की संक्षिप्त रिपोर्ट नोडल अतिरिक्त जिला कलेक्टर और सीएमएचओ को उपलब्ध कराई जाएगी। अभियान के तहत प्रतिदिन लिये गए नमूनों की आयुक्त खाद्य सुरक्षा के माध्यम से मुख्य खाद्य विश्लेषक द्वारा समय पर जांच कर जिलेवार और लैबोरेटरीवार सूचनाएं राज्य नियंत्रण कक्ष में भेजी जाएंगी।

सूचना देने वालों को 51,000 रूपए की प्रोत्साहन राशि

अभियान की अवधि में खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वाले उत्पादकों के विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिए सूचना देने वालों को 51,000 रूपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। मिलावट की जांच के उपरान्त फूड टेस्टिंग लैब में नमूने में मिलावट प्रमाणित पाए जाने के बाद जिला कलेक्टर द्वारा सूचना देने वालों को प्रोत्साहन राशि दी जाएगी और उनकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी। मिलावटखोरों में भय व्याप्त करने तथा सूचना देने वालों को प्रोत्साहित करने के लिए अभियान के अंतर्गत की जाने वाली कड़ी कार्यवाही का समुचित प्रचार-प्रसार किया जाएगा।

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