अच्छी ख़बर दिल्ली विश्विद्यालय के छात्रों के लिए…

नई दिल्ली । दिल्ली विश्विद्यालय में पढ़ने वाले हजारों छात्रों के लिए अच्छी खबर आई है। विश्विद्यालय ने इस वर्ष स्नातक , परास्नातक सहित विभिन्न कोर्स में 15 फ़ीसदी सीटें बढ़ाने का फैसला किया था। इस फैसले के बाद से ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि डीयू इस वर्ष फ़ीस वृद्धि कर सकता है। दरअसल सीटें बढ़ने से कॉलेजों पर संसाधन बढ़ाने का दबाव है, इसीलिए इस वर्ष फ़ीस बढ़ने की उम्मीद थी। लेकिन शैक्षणिक वर्ष 2020-21 में कॉलेजों ने फीस की जो जानकारी डीयू को भेजी है उसमें पुरानी फीस ही दर्शाई गई है। बढ़ी हुई फीस का इसमें कोई जिक्र नहीं है। आपको बता दें कि पिछले वर्ष भी डीयू ने अपनी सीटों में 10 फीसदी का इज़ाफ़ा किया था। इस महामारी काल में फीस न बढ़ना अभिभावकों के लिए एक राहत की बात है।
एक महाविद्यालय में दाखिला प्रक्रिया से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि इस वर्ष लोगों की खराब आर्थिक स्थिति को देखते हुए कॉलेजों ने फीस नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया है। हालांकि फीस नहीं बढ़ने के बावजूद छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं में कमी नहीं आएगी।

कोरोना महामारी के कारण ठप हुए कारोबार के बाद अभिभावक और छात्र दोनों ही चिंताओं में थे कि कॉलेज की फीस कैसे भरी जाए। लेकिन छात्रसंघ और अभिभावकों के दबाव के कारण ज़्यादातर कॉलेजों ने इन्स्टालमेन्ट / क़िस्त में इस सत्र की फीस भरने की सुविधा दी है। दरअसल दिल्ली विश्वविद्यालय के कई कॉलेज ऐसे कई स्व वित्त पोषित कोर्स चलाते हैं जिनकी फीस सामान्य से अधिक है। ऐसे कोर्स की फीस 25 हजार से 60 हजार तक है। सामान्य कोर्स की फीस 5 से 25 हजार तक है। अलग अलग कॉलेजों में एक ही कोर्स की फीस भी अलग अलग है। हालांकि स्व वित्त पोषित कोर्स चलाने वाले कॉलेजों ने भी इस वर्ष की फीस पिछले वर्ष के बराबर ही रखी है। इसके साथ ही इस वर्ष 3 किस्तों में फीस देने की सुविधा है जिसके लिए कोई लेट फाइन या अतिरिक्त शुल्क वसूल नहीं किया जाएगा। रामलाल आनंद महाविद्यालय ने भी छात्रों को विशेष सुविधा देते हुए इस सत्र की फीस के लिए 3 किस्तों की व्यवस्था की है।

दिल्ली विश्विद्यालय के प्रिंसिपल संघ के सचिव और आर्यभट्ट कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मनोज सिंहा का कहना है कि कॉलेज अपने स्तर पर 10 फीसदी तक फीस बढ़ाने के लिए स्वतंत्र हैं। लेकिन अभिभावकों की समस्या को समझते हुए ज़्यादातर कॉलेजों ने फीस नहीं बढ़ाई है।
डीयू में अल्पसंख्यक कॉलेजों में न तो सीट बढ़ी है और न ही फीस। डीयू में 2 ईसाई अल्पसंख्यक और 4 सिख अल्पसंख्यक कॉलेज हैं। सिख अल्पसंख्यक ‘खालसा कॉलेज’ के प्रिंसिपल डॉ. जसविंदर सिंह ने कहा कि हमारे यहां न फीस न बढ़ी है और न ही कोई सीट। सबकुछ पिछले वर्ष जैसा ही है।
रामजस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मनोज खन्ना का कहना है कि इस वर्ष हमारे कॉलेज में सीटें बढ़ी हैं। रामजस की कला क्षेत्र के कॉलेजों में विशेष पहचान है। हिस्ट्री की सीट यहां 2 वर्ष पहले 62 थी जबकि इस वर्ष 78 विद्यार्थी इसमें दाखिला लेंगे। छात्रों की संख्या बढ़ने से कॉलेज का प्रति छात्र पर होने वाला खर्च बढ़ेगा। ये कॉलेज प्रशासन के लिए एक चुनौती होगी, लेकिन कॉलेज इससे निपटने में सक्षम है। छात्रों को इस वजह से किसी तरह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

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