30 फीसदी बढ़कर 53.34 लाख करोड़ रुपये हुई RBI की बैलेंस शीट

मुंबई। कोविड-19 के बावजूद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपनी बैलेंस शीट में 30 प्रतिशत की वृद्धि की। साल 2019-20 में 30 फीसदी की बढ़त के साथ आरबीआई की बैलेंस शीट 53.34 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई है। आरबीआई का वित्तीय वर्ष जुलाई-जून तक चलता है। आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, बैलेंस शीट के एसेट हिस्से में बढ़त घरेलू निवेश में दर्ज हुई 18.4 फीसदी की बढ़त और विदेशी निवेश में दर्ज हुई 27.28 फीसदी की बढ़त की वजह से देखने को मिली है। वहीं वहीं कर्ज में 245.76 फीसदी और गोल्ड रिजर्व में 52.85 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 30 जून तक कुल एसेट्स में घरेलू एसेट्स 28.75 फीसदी रहे, वहीं फॉरेन कंरसी एसेट्स और गोल्ड एसेट्स का हिस्सा 71.25 फीसदी रहा।

इसके साथ ही देनदारी के हिस्से बढ़त की मुख्य वजह नोट जारी करने में 21.5 फीसदी, अन्य देनदारी और प्रोविजन में 30.5 फीसदी और डिपॉजिट में 53.7 फीसदी की बढ़त की वजह से देखने को मिली है। 73 हजार करोड़ रुपये का प्रोविजन आकस्मिक फंड में भी ट्रांसफर किया गया।

इससे पहले साल 2007-08 में बैलेंस शीट में तेज उछाल दर्ज किया गया था।

रिजर्व बैंक की बैलेंस शीट देश की अर्थव्यवस्था के कामकाज में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, मुख्य रूप से इसकी मुद्रा मुद्दे के साथ-साथ मौद्रिक नीति और रिजर्व प्रबंधन उद्देश्यों के लिए की गई गतिविधियों को दशार्ती है।

यह वर्ष 57,128 करोड़ रुपये के समग्र अधिशेष (सरप्लस) के साथ समाप्त हुआ, जिसे आरबीआई ने लाभांश के रूप में सरकार को हस्तांतरित कर दिया।

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