आज से खुली इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी सुनवाई, कोर्ट की संख्या बढ़ाने की मांग

प्रयागराज। कोरोना वायरस के कहर में भी इलाहाबाद हाईकोर्ट में सोमवार से वीडियो कांफ्रेंसिंग के साथ खुली अदालत में भी सुनवाई होगी। कोरोना संक्रमण के मद्देनजर खुली अदालत में सुनवाई रोकी गई थी।

कोरोना संक्रमण के कारण केवल अतिआवश्यक मामलों की सुनवाई वीडियो कांफ्रेंसिंग से की जा रही थी। वकील खुली अदालत में सुनवाई की मांग उठा रहे थे। मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर के आदेश पर पुन: खुली अदालत में सुनवाई होगी। साथ ही ई-दाखिले के साथ शारीरिक रूप से कार्यालय में मुकदमों का दाखिला किया जा सकेगा। अब सुनवाई की कोई अर्जेंसी अर्जी देने की जरूरत नहीं होगी।

मुख्य न्यायाधीश ने 24 जुलाई को घोषित व्यवस्था को फिर से लागू करने का फैसला लिया है। इसके तहत 24 अगस्त से हाईकोर्ट में 32 अदालतें बैठेंगी। 17 अगस्त को घोषित योजना के तहत 25 अगस्त से 10 से 21 अगस्त तक के निर्धारित तारीखों के अनुसार मुकदमों की सुनवाई की जाएगी। वरिष्ठ अधिवक्ता वशिष्ठ तिवारी का कहना है कि हाईकोर्ट में लंबित मुकदमों की संख्या अधिक है। मुकदमे तेजी से निस्तारित करने के लिए कोर्ट की संख्या बढ़ाने की जरूरत है। इसके लिए कम से कम 60-70 कोर्ट बैठाने की जरूरत है।

पॉजिटिव-निगेटिव के चक्कर में परेशान हाईकोर्ट के कर्मचारी

कोरोना जांच रिपोर्ट में हो रही मनमानी की जद में इलाहाबाद हाईकोर्ट के कर्मचारी व अधिकारी भी हैं। महानिबंधक अजय कुमार श्रीवास्तव ने स्टाफ को राजापुर स्थित कैंप में कोरोना जांच कराने का आदेश दिया है। इस दौरान कैंप में भीड़ से बचने के लिए कुछ अधिकारियों ने धूमनगंज केंद्र पर जांच करवाई। उनको राजापुर कैंप पर दोबारा जांच कराना पड़ा तो धूमनगंज से मिली पॉजिटिव रिपोर्ट राजापुर कैंप जांच में निगेटिव आयी। अनुभाग अधिकारी योगेंद्र कुमार सिंह को उनके घर में आइसोलेट करने पुलिस पहुंच गयी। उन्होंने निगेटिव रिपोर्ट दिखाकर कहा कि उनमें कोरोना के लक्षण नहीं है। ऐसी ही स्थिति समीक्षा अधिकारी दीपक कुमार व रवींद्र कुमार की भी है। एक ही दिन में आधे घंटे में रिपोर्ट पॉजिटिव व निगेटिव दोनों आयी है। वहीं, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के महासचिव प्रभाशंकर मिश्र की रिपोर्ट पहले पॉजिटिव आई तो दूसरी जगह जांच रिपोर्ट निगेटिव आ गई। हाईकोर्ट के स्टाफ ने शिकायत महानिबंधक से की है। निबंधक शिष्टाचार आशीष कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि जब दो रिपोर्ट विरोधाभाषी है तो तीसरी जांच करानी चाहिए। गड़बड़ी करने वाले अधिकारी व कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं, हाईकोर्ट बार के पूर्व महासचिव जेबी सिंह का कहना है कि कोरोना रिपोर्ट आते ही संबंधित व्यक्ति व परिवार को दिक्कत झेलनी पड़ती है। ऐेसे में जांच में लापरवाही नहीं होनी चाहिए। हाईकोर्ट कर्मचारी अधिकारी संघ के महासचिव बृजेश शुक्ल ने कहा कि जो व्यक्ति कोरोना संक्रमण की जांच कराने जाता है उसका व्यक्तिगत विवरण के साथ व्हाट्सएप नंबर भी दर्ज करते हैं। व्हाट्सएप पर रिपोर्ट उपलब्ध कराने की पारदर्शिता नहीं है। संघ ने रिपोर्ट में गड़बड़ी की शिकायत मुख्य न्यायधीश से करने का निर्णय लिया है।

शनिवार व रविवार को लगे कोरोना जांच का कैंप

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के कई बार उपाध्यक्ष रहे अधिवक्ता एसके गर्ग ने मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया है कि सीएमओ प्रयागराज के नेतृत्व में हर शनिवार, रविवार को हाईकोर्ट क्रिकेट मैदान में कैंप लगवाया जाय। वहां हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं, स्टाफ व मुंशियों की कोरोना जांच करायी जाय। गर्ग ने बार काउंसिल, ट्रस्टी कमेटी व हाईकोर्ट बार एसोसिएशन से अनुरोध किया है कि कोरोनाकाल में जरूरतमंद वकीलों के साथ मुंशियो की आॢथक सहायता देने की पहल करें। अधिवक्ता की तरह मुंशी भी हाईकोर्ट के अभिन्न अंग हैं। महाधिवक्ता से अनुरोध किया कि वह जरूरतमंद वकीलों, मुंशियों की आॢथक सहायता देने के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजकर उसे अमल में लाने का प्रयास करें। गर्ग ने सरकारी वकीलों की फीस में विभेदकारी कटौती को वापस लेने की मांग की है। कहा कि जब कोई भी मंत्री, विधायक व सरकारी अधिकारी वेतन से कटौती नहीं करा रहा है तो केवल सरकारी वकीलों की फीस की कटौती सरकार की ज्यादती है।

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