राहुल बने मददगार ‘सियासी पाठशाला’ के मजदूरों के

भोपाल/झांसी। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी अपनी सियासी पाठशाला यानी बुंदेलखंड क्षेत्र के मजदूरों के लिए मददगार बनकर सामने आए। गांधी ने इन मजदूरों को विशेष वाहन से उनके गांव तक तो भिजवाया ही है साथ ही में कांग्रेस ने उनके राशन पानी के इंतजाम की जिम्मेदारी भी ली है।

पिछले दिनों अपने घरों को जाने वाले मजदूरों का हाल जानने राहुल गांधी ने सड़क किनारे बैठ कर संवाद किया था, यह मजदूर बुंदेलखंड के झांसी जिले के रानीपुर के रहने वाले हैं। राहुल गांधी की बातचीत का यह वीडियो जारी किया गया है। राहुल ने इन मजदूरों के दर्द को समझा, जाना और उन्हें विशेष वाहन से उनके गांव तक भिजवाया। इन मजदूरों के वाहन मध्य प्रदेश के ग्वालियर और दतिया से होकर भी गुजरे। इस दौरान इनकी जरूरतों को स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने पूरा किया।

दिल्ली से झांसी के रानीपुर पहुंचे इन 14 मजदूरों का पहले स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया और इसके बाद इन्हें होम क्वारंटाइन किया गया है। कांग्रेस की झांसी इकाई के जिला अध्यक्ष भगवानदास कोरी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनको आवश्यक जरूरत की सामग्री मुहैया कराने का भरोसा दिलाया है।

अपने गांव पहुंचे मजदूर सुरेंद्र कुमार प्रजापति ने संवाददाताओं को बताया कि वह तो अंदर से हताश और निराश थे और घर की तरफ पैदल ही बढ़े जा रहे थे इसी दौरान राहुल गांधी उनके लिए भगवान बन कर आ गए और उन्होंने मदद का भरोसा दिलाया इसके बाद वाहन उपलब्ध कराए गए और वे अब अपने गांव पूरी तरह सुरक्षित पहुंच चुके हैं।

सुरेंद्र बताते हैं कि उन्हें यह उम्मीद ही नहीं थी कि कोई व्यक्ति या राजनेता उनकी मदद के लिए आगे आ सकता है मगर राहुल गांधी ने इस विपत्ति के समय उनकी मदद की, जिसे वे जिंदगी भर नहीं भूलेंगे।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष भगवान दास कोरी ने आईएएनएस को बताया कि यह मजदूर अपने घरों को पहुंच गए हैं और पूरी तरह संतुष्ट हैं। जिला इकाई ने इन मजदूरों को हर संभव सहयोग और मदद का भरोसा दिलाया है। इन मजदूरों ने राहुल गांधी के प्रति आभार जताया है क्योंकि विपत्ति के समय उनकी राहुल गांधी की ओर से मदद जो की गई है।

आपको बता दें कि बुंदेलखंड राहुल गांधी की सियासी पाठशाला माना जाता है क्योंकि उन्होंने वर्ष 2008 में इस इलाके का सड़क मार्ग से दौरा किया था। इतना ही नहीं, इस दौरान उन्होंने कई गांव में गरीबों की झोपड़ी में रातें भी गुजारी थी। उसके बाद ही तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने बुंदेलखंड के लिए 7200 करोड़ का विशेष पैकेज मंजूर किया था।

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक अशोक गुप्ता का कहना है कि राहुल गांधी ने वास्तव में जमीनी हालात को बुंदेलखंड के दौरे से ही जाना था, सियासी पाठशाला तो उनकी बुंदेलखंड ही है, वे यहां गरीबों की झोपड़ी में रुके थे और यही कारण रहा कि उनके हर भाषण में बुंदेलखंड के लोगों का दर्द सुनाई दिया।

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