अपनाएं ये एक्सपर्ट टिप्स बच्चों को कोरोना से बचाने के लिए

नई दिल्ली। धीरे-धीरे खुलते लॉकडाउन के बीच कोरोना वायरस से बच्चों का बचाव हमारे लिए बेहद जरूरी हो गया है। जुलाई की शुरुआत में सीबीएसई 12वीं की परीक्षा होगी। उसके आसपास स्कूल खोलने पर भी विचार किया जा सकता है। वहीं, दुनिया के कई देशों में स्कूल खुलने भी लगे हैं। ऐसे में बच्चों को इस खतरनाक वायरस से बचाने के लिए हम कुछ एक्सपर्ट टिप्स शेयर कर रहे हैं, जो आपके लिए बेहद मददगार साबित हो सकते हैं-

दयानंद मेडिकल कॉलेज, लुधियाना के डॉ विवेक गुप्ता का कहना है कि सरकार की गाइडलाइंस का पालन करना बेहद जरूरी है। 10 साल से कम उम्र के बच्चों को बाहर नहीं जाने देना है। अभी बच्चों को ऑनलाइन ही पढ़ने दें। साथ ही बच्चों को ट्रेन करना होगा कि वे सोशल डिस्टैंसिंग का पालन कैसे करें, क्योंकि बच्चों में एक-दूसरे के करीब जाने की आदत होती है। उन्हें बाहर की चीजें छूने की आदत होती है। अब उन्हें सिखाना होगा कि बाहर की चीजें नहीं छूनी है। साथ ही बच्चों को सिखाना है कि वायरस से डरना नहीं है, बल्कि उन्हें बचाव करना है। सरकार ने भी बच्चों को यह सीख देने के लिए कॉमिक्स शुरू की है। बच्चों को ये कॉमिक्स लाकर दें। टीचर को भी बच्चों को कोरोना से बचने के लिए ट्रेन करना चाहिए।

इटावा के पूर्व मेडिकल ऑफिसर डॉ अंकुर चक्रवर्ती ने बताया कि तीन साल से कम के बच्चों की रोग से लड़ने की क्षमता काफी कम होती है। इसलिए उन्हें बाहर न जाने दें। इससे बड़े बच्चे हों तो उन्हें मास्क पहनाकर ही बाहर ले जाएं। बच्चों को मुंह में हाथ डालने की आदत होती है। इस आदत को छुड़ाना भी जरूरी है। बच्चों को अजनबियों से दूर रहना सिखाएं। वहीं, अगर बच्चे को सर्दी-जुकाम हो तो काफी एहतियात बरतनी चाहिए।

दिनचर्या में ज्यादा बदलाव न करें

भले ही सब लोग घर में हों, लेकिन बच्चों की दिनचर्या में बहुत ज्यादा बदलाव न करें। उन्हें सब कुछ सामान्य ही लगना चाहिए। उन्हें समय से उठाएं और नहलाएं-धुलाएं।

20 सेकेंड की सीख

बच्चों को साफ कैसे रहना है और वायरस से बचने के लिए कैसे 20 सेकेंड तक अच्छे से हाथ धुलना है, ये सिखाएं। साथ ही इसकी प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दें। बच्चे जब भी बाहर निकलें, लौटने के बाद उनके हाथ धुलाएं। बच्चों को यह भी पता होना चाहिए कि 20 सेकेंड कितना लंबा होता है। इसके लिए टाइमर सेट कर बच्चों को ट्रेनिंग दे सकते हैं। उन्हें बताएं कि खाने से पहले भी हाथ धोना बेहद जरूरी है। बच्चों को स्कूलों में भी हाथ धुलने की सीख देनी है। यह भी बताएं कि बच्चों को अपना चेहरा नहीं छूना है। घर के किशोर उम्र के बच्चों को मास्क जरूर पहनाएं।

सामान शेयर न करने की आदत विकसित करें

बच्चों को बताएं कि उन्हें अपने सामान दूसरों के साथ शेयर नहीं करने हैं। खासकर स्कूल में पेंसिल और खाने-पीने की चीजें। उन्हें यह भी बताएं कि बच्चों को छींकने और खांसते वक्त कैसे मुंह ढंकना है। हाथ नहीं, कोहनी से मुंह ढंकना सिखाएं।

जूते और बैग

बच्चे अगर बाहर जा रहे हैं तो उनके जूते घर के बाहर ही उतरवाएं। याद रहे कि वे घर के भीतर वायरस लेकर नहीं आएं। अगर कुछ महीनों बाद उनके स्कूल खुलते हैं तो उनके बैग को भी बैक्टीरिया फ्री रखना जरूरी है।

कपड़े बदलें

बच्चे जब बाहर से वापस लौटें तो उन्हें कपड़े बदलने के लिए कहें। हालांकि, बच्चों के कपड़ों के जरिए कोरोना इंफेक्शन का खतरा कम है। फिर भी एहतियात बरतना जरूरी है। बच्चों के घर के बाहर जाने के कपड़े और घर के कपड़े अलग-अलग होने चाहिए।

हाई रिस्क फैमिली मेंबर को बचाएं

अगर आपके घर में बुजुर्ग हैं या किसी गंभीर बीमारी के मरीज हैं तो उन्हें कोरोना से बचाएं। इससे घर के बच्चे भी बीमारी से सुरक्षित रहेंगे।

बच्चों को ताजी हवा में ले जाएं

अच्छी सेहत के लिए बच्चों के लिए शारीरिक एक्टिविटी जरूरी है। बच्चों को घर की बालकनी, लॉन, सोसाइटी के पार्क या पास के पार्क में ले जा सकते हैं। इससे बच्चों की एंजाइटी कम होगी और इम्युनिटी बढ़ेगी।

हाई रिस्क वाली जगहों पर न जाएं

बच्चों को उन परिवारों में जहां कोई क्वारंटाइन हो, कोरोना पॉजिटिव हो, वहां न ले जाएं। बच्चों को पब्लिक स्पेस, लाइब्रेरी, मॉल (जब भी खुले) और कंटेनमेंट जोन के पास न जाने दें। सार्वजनिक जगहों पर पानी पीने से भी बचना चाहिए।

घर को साफ रखें

घर के दरवाजे, फर्श, सीढ़ी की रेलिंग, टेबल, फोन और खिलौनों को सैनेटाइज करते रहें। बच्चों को बताएं कि उन्हें मॉस्क कब और कैसे पहनना है।

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