कोरोना से भोपाल में मरने वाले 20 में से 17 गैस पीड़ित, कई की हालत गंभीर

भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कोरोना वायरस के संक्रमण का सबसे ज्यादा शिकार भोपाल के गैस पीड़ित हो रहे है। अब तक कोरोना से राजधानी में 20 लोगों की मौत हो चुकी है जिसमें से 17 गैस पीड़ित है। वहीं बीमारों में शामिल कई गैस पीड़ितों की हालत गंभीर बनी हुई है। ज्ञात हो कि भोपाल में वर्ष 1984 में यूनियन कार्बाइड से जहरीली गैस का रिसाव हुआ था। हादसे में हजारों लोग मारे गए थे और लाखों लोग अब भी विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त है। सरकारी आंकड़े बताते है कि लगभग पौने छह लाख गैस पीड़ित है। इनमें फेफड़े, गुर्दे, हृदय और लिवर से संबंधित बीमारियों के लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है। कोरोनावायरस के संक्रमण का असर भी बीमार लोगों पर ज्यादा हो रहा है ऐसा चिकित्सा शोधों से सामने आया है।

भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना ढींगरा ने आईएएनएस से कहा, “कोरोना की दस्तक के बाद से ही गैस पीड़ितों की स्थिति को लेकर प्रशासन और शासन को अवगत कराया जाता रहा है, मगर किसी ने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया। यही कारण है कि भोपाल में अब तक 20 लोगों की मौत हुई है, उनमें 17 की पहचान गैस पीड़ितों के तौर पर हो चुकी है। जो बीसवीं मौत हुई है उसके बार में ब्यौरा नहीं मिल पाया है।”

ढींगरा ने सरकार द्वारा गैस पीड़ितों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा “भोपाल गैस पीड़ितों के लिए बने भोपाल मेमोरियल हस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमएचआरसी) को राज्य सरकार ने राज्य स्तरीय नोवल कोरोना वायरस (कोविड-19) उपचार संस्थान के रूप में चिन्हित कर गैस पीड़ितों का इलाज ही बंद कर दिया था, मगर बाद में बदलाव किया गया। गैस पीड़ितों का अब वहां इलाज जारी है।”

वे कहती हैं कि राजधानी में बड़ी संख्या में गैस पीड़ित ऐसे है जो फेफड़े, हृदय और गुर्दे की बीमारी से पीड़ित है। यही कारण है कि 21 मार्च को गैस पीड़ितों के संगठनों ने राज्य एवं केंद्र सरकार को पत्र लिखकर आगाह किया था। साथ ही यह आशंका जताई थी कि कोरोना वायरस का संक्रमण गैस पीड़ितों पर अन्य की तुलना में पांच गुना ज्यादा हो सकता है। उसके बाद भी स्थितियों को नजर अंदाज किया गया।

भोपाल के जिलाधिकारी तरुण पिथोड़े भी मानते है कि गैस पीड़ितों को कोराना के संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा है। इसलिए गैस पीड़ितों और 60 साल से अधिक उम्र के व्यक्तियों के लिए सभी गैस राहत अस्पतालों में स्क्रीनिंग की जा रही है। इन मरीजों का इम्यून सिस्टम कमजोर है और यह किसी न किसी बीमारी से पीड़ित हैं इसके लिए आवश्यक है कि ऐसे सभी व्यक्तियों को स्क्रीनिंग कराई जाए।

पिथोड़े के अनुसार सर्दी खांसी बुखार के मरीजों की सैंपलिंग हो इसके लिए गैस राहत अस्पतालों को इसके लिए अधिकृत किया गया है । इन सभी गैस पीड़ितों का डेटा बीएचएमआरसी और राष्ट्रीय पर्यावरण स्वास्थ संस्थान उपलब्ध कराएगा।

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