लॉकडाउन इफेक्ट : घर पहुंचेगे मजदूर बुलंदशहर प्रशासन की संवेदनशीलता से

बुलंदशहर। लॉकडाउन की स्थित में कोरोनावायरस से डरे- सहमे मजदूरों को उस समय राहत मिल गई, जब उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के जिला प्रशासन ने उनके प्रति सवेदनशीलता दिखाई। घर परिवार से दूर मजदूरी कर जीवन- यापन करने वाले मजदूरों को न सिर्फ जांच कराई बल्कि, उन्हें बस मुहैया करकर घर भेजा गया है। दिल्ली और एनसीआर में काम करने वाले दिहाड़ी मजदूरों के लिए लॉकडाउन कहर बनकर टूटा है। रोज कमाकर खाने वालों को जब लगा कि 21 दिन में स्थिति खराब हो सकती है तो बिना कुछ सोचे समझे 500 और इससे ज्यादा किलोमीटर का सफर पैदल ही तय करना शुरू कर दिया। उत्तर प्रदेश के कानपुर, उन्नाव, अलीगढ़ और अन्य आसपास के जिलों से काम करने दिल्ली आए मजदूरों को बस अपने गांव पहुंचने की जल्दी थी। कहीं-कहीं से खबर आई कि ऐसे पैदल जाने वाले लोगों को पुलिस की सख्ती के शिकार होना पड़ा, लेकिन ऐसे में बुलन्दशहर प्रशासन ने मानवता की मिसाल पेश की।

उन्होंने इन सभी की भोजन और खाने की व्यवस्था ही नहीं की, बल्कि इन्हें घरो तक भी पहुंचाने की व्यवस्था की। इस बारे में जब प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को को पता चला कि करीब 4000 हजार लोग पैदल ही अपने घरों की ओर चल दिये हैं तो उन्होंने जिला प्रशासन से उनकी मदद करने के निर्देश दिये।

बुलंदशहर के डीएम रवीन्द्र कुमार और एसएसपी संतोश कुमार ने खुद बुलंदशहर की सभी सीमाओं पर जाकर परेशान मुसाफिरों का हाल जाना। वहीं लॉकडाउन के मद्देनजर भी प्रशासन ने लोगों लगातार समझाने का प्रयास किया। इसके बाद इनकी जांच कराई और इन्हें भोजन मुहैया कराया। साथ ही बस का इंतजाम कर इन्हें घर भिजवाया।

जिलाधिकारी रवीन्द्र कुमार ने आईएएनएस को बताया, “4000 हजार लोगों के भोजन की व्यवस्था की गई। ये सभी अलीगढ़, उन्नाव, कन्नौज, उन्नाव, कानपुर जैसे शहर के थे। यह रिक्शा चलाने का काम करते हैं और दिहाड़ी मजदूर थे। यह 24 मार्च से ही पैदल आ रहे थे। इनके लिए करीब 250 बसों का इंतजाम करके इन्हें भिजवाया गया है। उन्होंने बताया जितने भी लोग गये हैं उनकी सभी की जांच भी हुई है और बसों को सैनिटाइज भी किया गया है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संतोश कुमार ने बताया कि दिल्ली से मजदूर के पैदल आने की सूचना मिली तो पहले उनके जांच की व्यवस्था की गयी। फिर उनके खाने व्यवस्था की गयी है। कुछ लोगों को अलीगढ़, बदायूं, कन्नौज के थे। उनके लिए सरकारी बसों की व्यवस्था की गयी। कुछ प्राइवेट वाहनों से भेजा गया।

ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री ने कोरोना लॉकडाउन के दृष्टिगत प्रदेश के बॉर्डर पर आ रहे अन्य राज्यों को पैदल जाने वाले मजदूरों व कर्मकारों के लिए मानवीय आधार पर विशेष व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।

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