रेलवे ने संस्कृत में रखा उत्तराखंड स्टेशनों का नाम, खड़ा हुआ विवाद

उत्तराखंड में संस्कृत को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से रेलवे मंत्रालय ने राज्य के स्टेशन के नामों को बदलने का फैसला किया। जिन साइन बोर्ड्स पर रेलवे स्टेशनों के नाम हिन्दी, अंग्रेजी और उर्दू में लिखे हुए थे वे अब हिन्दी, अंग्रेजी और संस्कृति में लिखे जाएंगे।

इसी कड़ी में, देहरादून रेलवे स्टेशन का नाम देहरादूनम और ऋषिकेश का नाम ऋषिकेशह कर दिया गया, लेकिन नाम बदलने का बाद अब विवाद पैदा हो गया है।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

उत्तराखंड में रेलवे स्टेशनों के नाम बदलने को लेकर उस वक्त कदम उठाए गए जब एक स्थानीय बीजेपी नेता ने जनवरी में रेलवे अधिकारियों को पत्र लिखते हुए कहा पूछा कि क्यों नहीं रेलवे के साइन बोर्ड्स संस्कृत में किए गए हैं, जबकि रेलवे के मैन्युअल में यह अनिवार्य था कि जो भी राज्य की दूसरी भाषा है उसे साइन बोर्ड पर लिखी जाएगी। उत्तराखंड के मामले में संस्कृति यहां की दूसरी भाषा है।

पिछले हफ्ते, जब तीन महीने के बाद देहरादून रेलवे स्टेशन आम लोगों के लिए खोला गया तो उसके साइन बोर्ड पर हिन्दी और अंग्रेजी के साथ संस्कृति में देहरादूनम लिखा गया था।

देहरादून का नाम संस्कृत करने जिसे बाद में बदल दिया गया, इसके बारे में बोलते हुए मुरादाबाद रेलवे डिवीजन के सीनियर डिवीजनल कॉमर्शियल मैनेजर रेखा शर्मा ने कहा- “यह नाम कंस्ट्रक्शन एजेंसी की तरफ से लिखा गया था जो रेनेवोट कर रही थी। उसने संस्कृत के साथ बोर्ड लगा दिया था। जैसे ही यह मामला सामने आया, बोर्ड को हटा दिया गया।”

संस्कृत बोर्ड हटाने पर विवाद

इसके विरोध में बुधवार को संस्कृत महाविद्यालय शिक्षक संघ ने स्टेशन निदेशक को ज्ञापन दिया। रेलवे स्टेशन के साइन बोर्डों पर संस्कृत में नाम हटाए जाने के विरोध में संस्कृत महाविद्यालय शिक्षक संघ और अखिल भारतीय देवभूमि ब्राह्मण जन सेवा समिति पदाधिकारियों ने स्टेशन निदेशक को ज्ञापन दिया। दोनों संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों ने कहा कि अगर दो दिन के अंदर स्टेशन पर लगे साइन बोर्डों पर संस्कृत भाषा में देहरादून का नाम नहीं लिखा तो संस्कृत शिक्षक संघ स्वयं लिखेगा।  संघ के प्रदेश अध्यक्ष डा. रामभूषण बिजल्वाण और ब्राह्मण सेवा समिति के अध्यक्ष अरुण कुमार शर्मा ने स्टेशन निदेशक को ज्ञापन दिया।

प्रशासन को लिखा
स्टेशन निदेशक ने कहा कि राज्य की द्वितीय भाषा में स्टेशन का नाम लिखा जा सकता है। संस्कृत में नाम उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन को पत्र लिखा था। इसका जवाब नहीं मिला है। ऐसे में तय नहीं कि संस्कृत में नाम कैसे लिखा जाना है। हालांकि, उन्होंने उर्दू से नाम हटाए जाने की बात से इनकार किया। स्टेशन निदेशक से मिलने वालों में सुमित रंजन शर्मा, रोहित, अनुराग, मुकेश खंडूरी, रामप्रसाद थपलियाल, चंद्रकांत, नवीन भट्ट शामिल रहे।

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