आकर्षण का केंद्र बनी पर्यावरण संरक्षण की मुहिम, बनाया 26 हजार प्लास्टिक की बोतलों से आशियाना

नैनीताल जिले के दूरस्थ गांव हरतोला में दिल्ली निवासी सत्येंद्र और उनके परिवार ने अनूठी पहल की है। यहां पानी और कोल्ड ड्रिंक की खाली बोतलों का इस्तेमाल कर प्लास्टिक हाउस तैयार किया है। पर्वतीय क्षेत्रों में बिखरी करीब 26 हजार बेकार प्लास्टिक की बोतलों को एकत्रित कर बनाया गया आशियाना पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यही नहीं, प्लास्टिक हाउस में कांच की बोतलों से बिजली के लैंप समेत अन्य सजावटी सामान भी तैयार किए गए हैं।

दिल्ली निवासी सत्येंद्र के परिवार ने महानगर की भागदौड़ से दूर नैनीताल की खूबसूरत वादियों में घर बनाने का मन बनाया। पर्यावरण संरक्षण को लेकर कई बार मुहिम चला चुके परिवार के सदस्यों का मन तब खट्टा हो गया, जब उन्होंने नैनीताल के पर्वतीय क्षेत्र में कूड़ा बिखरा देखा। इसके बाद उन्होंने यहां पड़ी प्लास्टिक की खाली बोतलें एकत्रित करना शुरू कर दिया।

सत्येंद्र बताते हैं कि इस दौरान उन्होंने 26 हजार से अधिक प्लास्टिक की बेकार बोतलें जमा कर घर का निर्माण शुरू कर दिया। नैनीताल, रामगढ़, भवाली, मुक्तेश्वर, नथुवाखान समेत आसपास के स्थानों से पॉलीथिन व प्लास्टिक की बोतलें इकट्ठा कर प्लास्टिक हाउस को रूप दिया गया। इसके बाद क्षेत्रवासियों ने इस पहल की खासी सराहना की।

प्लास्टिक हाउस के भीतर एक से बढ़कर एक सजावटी सामान भी तैयार किए गए। इनमें कांच की बोतल से बिजली लैंप, बेकार थर्माकोल से सजावटी सामान आदि शामिल हैं। यह घर पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। सैलानी यहां घर के साथ फोटोग्राफी करने तथा रुकने के लिए पहुंच रहे हैं।

ऐसे तैयार किया प्लास्टिक का घर
क्षेत्र से प्लास्टिक की बेकार बोतलें एकत्रित करने के बाद जाली की मदद से इन बोतलों को दीवार का रूप दिया गया। पीओपी के बाद इसे घर का रूप दिया गया। यह घर बाहर से सामान्य, जबकि अंदर से काफी आकर्षक दिखाई देता है। इसमें किचन, बाथरूम समेत अन्य सुविधाएं भी हैं।

अफ्रीकी रिश्तेदार ने दी थी घर बनाने की सलाह
सत्येंद्र और उनके परिवार को प्लास्टिक का घर बनाए जाने की सलाह उनके ही एक अफ्रीकी रिश्तेदार ने दी थी। रिश्तेदार ने बताया कि अफ्रीका समेत यूरोपियन देशों में प्लास्टिक की बोतल तथा पॉलीथिन एकत्रित कर घर बनाए जाते हैं। इसके बाद उन्होंने यहां प्लास्टिक हाउस बनाए जाने का फैसला लिया।

उत्तराखंड के अन्य स्थानों पर भी होगी पहल
सत्येंद्र के अनुसार उत्तराखंड के अन्य स्थानों पर भी प्लास्टिक समेत अन्य वेस्ट को एकत्रित कर घर बनाए जाने की पहल की जाएगी। उन्होंने बताया कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर वह जल्द ही कुमाऊं से इसकी शुरुआत करेंगे। इससे जहां प्रकृति को बचाया जा सकेगा, वहीं बेकार प्लास्टिक का उपयोग भी किया जा सकेगा।

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