जल्द नहीं मिलने वाला टैक्सपेयर्स को फायदा, इनकम टैक्स दर बदलने में लगेगी देर!

डायरेक्ट टैक्स रिफॉर्म पर टास्क फोर्स की सिफारिशों को लागू करने में देरी हो सकती है। सूत्रों ने बताया कि न्यू डायरेक्ट टैक्स कोड (DTC) पर टास्क फोर्स की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करने की अवधि को एक साल तक टाला जा सकता है। इसका मतलब है कि टास्क फोर्स ने इनकम टैक्स के स्लैब और दरों में बदलाव की जो सिफारिशें की हैं, उसका लाभ अगले वित्त वर्ष में टैक्सपेयर्स को शायद मिल ना पाए।

सरकार ने फिलहाल डायरेक्ट टैक्स रिफॉर्म पर सिफारिशों का वित्तीय नजरिए से आकलन करने के लिए रेवेन्यू डिपार्टमेंट को कहा है। डिपार्टमेंट यह अनुमान लगाएगा कि टास्क फोर्स की सिफारिशें लागू होने से सरकारी खजाने पर कितना बोझ बढ़ेगा और क्या यह बोझ सरकार उठा पाएगी? इस आकलन के बाद यह फैसला किया जाएगा कि टास्क फोर्स की सिफारिशों को लागू किया जाए या नहीं। एक सरकारी अधिकारी के अनुसार इकॉनमी में स्लोडाउन के दौर में सरकार ऐसे कदम नहीं उठाना चाहती जिनसे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़े। अभी सरकार का जोर कई सेक्टर्स में मंदी को समाप्त करने पर है। इसके लिए सरकार को अतिरिक्त खर्च भी करना पड़ रहा है।

क्या हैं सिफारिशें?

डायरेक्ट टैक्स पर गठित टास्क फोर्स ने पिछले महीने वित्त मंत्रालय को न्यू डायरेक्ट टैक्स कोड पर अपनी रिपोर्ट सौंपी है। अगर इस पर सरकार की मुहर लग गई तो यह मौजूदा इनकम टैक्स ऐक्ट की जगह ले लेगा। मौजूदा इनकम टैक्स ऐक्ट 58 साल पुराना है। इस टास्क फोर्स ने इनकम टैक्स छूट की मौजूदा 2.5 लाख रुपये की सीमा बढ़ाने का फैसला नहीं किया है लेकिन उसने कहा है कि टैक्सेबल इनकम को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 6 लाख रुपये कर देना चहिए। इसका मतलब है कि निवेश तथा अन्य छूटों को लेने के बाद अगर किसी की सालाना आमदनी 6 लाख रुपये बनती है तो उस पर कोई इनकम टैक्स नहीं लगेगा।

स्क फोर्स ने पांच टैक्स ब्रैकेट का प्रस्ताव रखा है। ये टैक्स ब्रैकेट 5, 10, 20, 30 और 35% हैं। अभी सिर्फ तीन टैक्स ब्रैकेट हैं।

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