परिवर्तिनी एकादशी का व्रत करने से सारे पाप हो जाते है नष्ट

भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मा एकादशी कहा जाता है. इसको परिवर्तिनी एकादशी और जयंती एकादशी भी कहा जाता है. इस एकादशी का व्रत करने से जाने अनजाने किये गए सारे पाप नष्ट हो जाते हैं. इस लोक में भौतिक सम्पन्नता और परलोक में मुक्ति की प्राप्ति होती है. इस समय गणेश महोत्सव भी चल रहा होता है अतः यह व्रत गणेश जी और श्री हरि दोनों की कृपा दिलवा देता है. इस एकादशी को भगवान् विष्णु के वामन स्वरुप की उपासना की जाती है. जिन लोगों को संतान सुख या धन की प्राप्ति करनी हो, उनके लिए यह व्रत अत्यंत कल्याणकारी है. इस बार यह एकादशी 09 सितम्बर को है.
क्या है इस व्रत की विधि?
– प्रातःकाल स्नान करके सूर्य देवता को जल अर्पित करें.
– इसके बाद पीले वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु और गणेश जी की पूजा करें.
– श्री हरि को पीले फूल, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करें.
– गणेश जी को मोदक और दूर्वा अर्पित करें.
– पहले गणेश जी और तब श्री हरि के मन्त्रों का जाप करें
– किसी निर्धन व्यक्ति को जल का, अन्न-वस्त्र का, या जूते छाते का दान करें.
– आज के दिन अन्न का सेवन बिलकुल न करें, जलाहार या फलाहार ही ग्रहण करें.
संतान प्राप्ति के लिए
– भगवान गणेश को अपनी उम्र के बराबर मोदक अर्पित करें
– संतान गणपति स्तोत्र का पाठ करें
– या “ॐ उमापुत्राय नमः” का जप करें
आर्थिक लाभ के लिए
– भगवान् गणेश को एक मिटटी या धातु का चूहा अर्पित करें
– इसके बाद उन्हें पीले फूल और पीला प्रसाद अर्पित करें
 “ॐ श्रीं सौम्याय सौभाग्याय गं गणपतये नमः” का 108 बार जप करें
– चूहे को अपने धन स्थान पर रखें
– व्यापार में सफलता के लिए
– हल्दी से गणेश जी बनाएं
– इनको मोदक , दूर्वा और बेलपत्र अर्पित करें
– इन गणेश जी को व्यापार के स्थान पर स्थापित कर दें

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