पांच लोग गिरफ्तार राजस्थान RSMSSB परीक्षा में सेंधमारी करने वाले

राजस्थान सबआर्डिनेट मिनिस्ट्रियल सर्विसेज सेलेक्शन बोर्ड (आरएसएसएसबी – RSSBB ) की परीक्षा में सेंधमारी करने वाले गिरोह के पांच सदस्यों को एसटीएफ की प्रयागराज यूनिट ने गुरुवार रात को जनेश्वरमिश्र पार्क के साथ गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए इन लोगों में डाटा इन्ट्री करने वाली कम्पनी राभव लिमिटेड के कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग ऑपरेटर, डाटा इन्ट्री ऑपरेटर, दो सरकारी टीचर और जीएसटी विभाग का एक कर्मचारी शामिल है। इन लोगों ने ओएमआर सीट स्कैन करते समय 18 अभ्यर्थियों की शीट पर सही उत्तर भर दिये थे। परीक्षा परिणाम में ये अभ्यर्थी सफल भी हो गये। इसके एवज में इन अभ्यर्थियों से लाखों रुपये वसूले गए थे। जिसमें राभव लिमिटेड के दोनों ऑपरेटरों को पांच-पांच लाख रुपये दिये जाने थे। इन कर्मचारियों को रुपये देने के लिये ही गिरोह के अन्य सदस्य गुरुवार की रात लखनऊ आये थे। कुछ दिनों पहले इस धांधली की सूचना पर पड़ताल में लगी एसटीएफ ने सभी को लेन-देन होने से पहले ही पकड़ लिया। एसटीएफ ने इनके पास 61 लाख 50 हजार रुपये और अन्य दस्तावेज बरामद किये हैं।

इनकी हुई गिरफ्तारी
एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश ने बताया कि पकड़े गए लोगों में इंदिरा नगर सेक्टर 11 निवासी विनोद कुमार गौड़, मौलवीगंज निवासी शादाब खान, रेल बाजार कानपुर का पंकज कुमार गुप्ता, प्रयागराज निवासी कमल किशोर यादव और जौनपुर निवासी अजीत कुमार शामिल हैं।

राभव लिमिटेड कम्पनी के कर्मचारियों ने की धांधली
एसटीएफ के एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज के मुताबिक इस धांधली की साजिश विनोद कुमार गौड़ ने रची थी। विनोद कुमार वर्ष 2014 से विपुलखंड स्थित राभव लिमिटेड कम्पनी में कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग ऑपरेटर पद पर काम कर रहा है। यहीं पर शादाब खान डाटा इन्ट्री आपरेटर था। राभव लि.कम्पनी कई प्रदेशों की प्रतियोगी परीक्षाओं की डाटा इन्ट्री और रिजल्ट बनाने का काम करती थी। वर्ष 2014 से 2016 तक इस कम्पनी ने यूपी एसएससी परीक्षा का रिजल्ट तैयार किया था। छह महीने पहले ही इस कम्पनी को राजस्थान सबआर्डिनेट सर्विसेज सेलेक्शन बोर्ड का काम मिला था। इस परीक्षा के तहत महिला सुपर वाइजर, कृषि पर्यवेक्षक और प्रयोगशाला सहायक पद की भर्ती परीक्षाओं की ओएमआर स्कैन कर रिजल्ट बनाने टेंडर इस कम्पनी को दिया गया था।

सरगना विनोद ने सेंधमारी का ताना बाना बुना 
आईजी ने बताया कि विनोद गौड़ और शादाब खान ने अपने मित्र पकंज गुप्ता को अपने साथ मिला लिया। पकंज से ऐसे अभ्यर्थियों को ढूंढ़कर लाने को कहा गया जो रिजल्ट में धांधली करवाकर पास होने पर अच्छी रकम दे सके। कुछ समय बाद ही पकंज ने 18 अभ्यर्थी अपने जाल में फंसा लिये। इन अभ्यथियों का रोल नम्बर व अन्य ब्योरा विनोद गौड़ को उपलब्ध करा दिया। साथ ही यह भी कहा कि अगर ये अभ्यर्थी सफल हो गये तो पांच-पांच लाख रुपये प्रति अभ्यर्थी के हिसाब से विनोद व शादाब के हिस्से में आयेंगे।

खाली ओएमआर सीट जमा करायी, फिर किया उलटफेर
विनोद गौड़ ने अभ्यर्थियों से कहा कि परीक्षा देने के दौरान ओएमआर शीट खाली छोड़ देना। अभ्यर्थियों ने ऐसा ही किया। परीक्षा के बाद जब अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट राभव लि. के प्रतिनिधि के तौर पर विनोद व शादाब ने स्कैन करना शुरू किया तो उक्त 18 अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट अलग कर ली। फिर अधिकृत ‘आंसर-की’ से मिलानकर उनकी ओएमआर शीट में सही उत्तर को गोलों से भर दिया। परीक्षा परिणा में यह सभी अभ्यर्थी सफल रहे थे। इसके बाद ही इन अभ्यर्थियों से पूरी रकम वसूल कर बांटने के लिये सब लखनऊ में जुटे थे।

 

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