सप्ताहभर में MP में 40 गायों की मौत, आखिर मौन क्यो है कमलनाथ सरकार ?

भोपाल। मध्यप्रदेश में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार अपना चुनावी वादा पूरा करने के लिए पंचायत स्तर पर गौशाला खोलने की योजना पर कार्य कर रही है। तो वहीं दूसरी ओर प्रदेश में गौशालाओं में गायों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला प्रदेश के राजगढ़ जिले की खिलचीपुर तहसील का है जहां एक सप्ताह में 40 गायों की मौत हो गई। राजगढ़ जिले के खिलचीपुर की श्री कृष्ण गौशाला में एक सप्ताह में करीब 40 गायों ने दम तोड़ दिया। जिसका कारण गायों के लिए समुचित व्यवस्था ना होना और क्षमता से अधिक गायों का गौशाला में रहना बताया जा रहा है। बारिश के मौसम में खुले में ही इन गायों को रखना पड़ रहा है, जिसकी वजह से गाय बीमार हो रही हैं और दम तोड़ रही हैं। गौशाला के चौकीदार रतनलाल ने बताया कि खुले आसमान के नीचे रहने के कारण, बारिश में भीगने और कीचड़ में बैठने की वजह से यह गाय बीमार होकर काल के गाल में समा रही हैं।

चौकीदार रतनलाल ने प्रभासाक्षी को बताया कि गौशाला में 600 गाय हैं लेकिन आस-पास के गांव वाले यहां अपनी फसलों को बचाने के लिए आवारा गायों को भी छोड़ जाते हैं। जिन्हें यहां रखना मुश्किल होता जा रहा है और संख्या बढ़ने से गौशाला में सुचारू व्यवस्थाएं गड़बड़ा जाती हैं। रतनलाल आगे कहते हैं कि वर्तमान में इस गौशाला में 7,000 गाय हैं। वहीं गौशाला में गाय की मौत के बाद खिलचीपुर नगर के ही बड़े मेला ग्राउंड में उन्हें खुले में फेंक दिया जाता है। जहां अन्य जानवर और पक्षी इन मृत गायों के  शव को नोच-नोच कर खा रहे हैं।यही नहीं खुले मैदान में गायों के शव पड़े रहने से अन्य कई बीमारियां भी फैल रही है। पिछले 27 सालों से गौशाला में चौकीदारी कर रहे रतनलाल बताते हैं कि हर रोज तीन से चार गाय तड़प तड़प कर अपनी जान दे रही हैं। इसके पीछे गौशाला में व्यवस्थाओं का ना होना और गायों की देखभाल और इलाज के अभाव में यह गाय मर रही हैं।

मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी के घोषणापत्र में वादा किया था कि अगर उनकी सरकार प्रदेश में बनती है तो वह प्रदेश में गौशालाएं बनवाएगे। जिसको लेकर सरकार बनने के बाद पशुपालन मंत्री ने ऐलान भी किया था कि प्रदेश में 300 स्मार्ट गौशाला खोली जाएंगे। जिसको लेकर विदेशी कंपनी से बातचीत चल रही है। इसके अलावा प्रदेश सरकार भी 1000 गौशालाएं अपने स्तर पर बनवाएगी। लेकिन आज तक यह गौशाला अस्तित्व में नहीं आई है। बल्कि पुरानी गौशालाओं में हालात और बढ़ से बत्तर हो गए है। कमलनाथ सरकार नई गौ शालाओं की तो छोड़ो इन पुरानी गौ शालाओं की भी सुध नहीं ले रही। जहां गाय मरने को मजबूर है। गौ रक्षक और सरकार सरकार भले ही बड़ी बड़ी बातें करें। लेकिन गायों की रक्षा को लेकर इन दोनों ही लोगों के कान पर जूं नहीं रेंग रही। प्रदेश के राजगढ़ जिले में एक सप्ताह में हुई 40 गायों की मौतों के बाद अब सवाल यह उठता है कि आखिर इन गायों की मौत व गौमाता की दुर्दशा का जिम्मेदार कौन है ?

 

 

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