फर्जीवाड़ाः खुलासा आयुष्मान भारत के फर्जी कार्ड से इलाज का

स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराए जाने के नाम पर एक के बाद एक फर्जीवाड़े के मामले सामने आ रहे हैं। अभी कर्मचारी राज्य बीमा योजना की मातृत्व लाभ योजना में हुए फर्जीवाड़े की जांच पूरी भी नहीं हो सकी कि अब आयुष्मान भारत में गरीबों के नाम पर योजना का पैसा हड़पने की बात सामने आई है। इस बार स्मार्ट सिटी में गोल्डन कार्ड बनाकर फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया।

एक मरीज के उपचार के बाद ही इस फर्जीवाड़ा की भनक विभाग के उच्चाधिकारियों को लग गई। पृथम दृष्टया में अब तक खुली घपलेबाजी कर परत में तीन कर्मचारी शक के दायरे में आ गए हैं, जिनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। इस मामले में अगले सप्ताह पंचकूला से उच्चाधिकारियों की टीम यहां पहुंचकर जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों से मिलकर पूरे तथ्य जानेगी।

ऐसे हुआ इस मामले का खुलासा 

15 अगस्त 2018 को प्रदेश में शुरू हुई आयुष्मान योजना के तहत राजकीय अस्पताल में पलवल की एक महिला अपना उपचार कराने पहुंची। आरोप है कि बीके अस्पताल में उस महिला का बिना आयुष्मान दस्तावेज के इलाज कर दिया गया। वह महिला फिर बीमार हुई तो अस्पताल पहुंची। जहां इलाज शुरू करने से पहले आयुष्मान कार्ड के दस्तावेज मांगे, लेकिन न तो पात्र कार्ड मुहैया करवा सकी और न ही अन्य जरूरी दस्तावेज। हालांकि इससे पहले भी उस महिला का बिना दस्तावेजों के सत्यापन बिना ही करीब 80 हजार रुपये का उपचार कर दिया गया। दूसरी बार इलाज न होने से मरीज के नाराज परिजनों ने कर्मचारियों के साथ कहासुनी कर दी। यह मामला सिविल सर्जन कार्यालय पहुंचा तो विभाग के अधिकारी यह देख दंग रह गए कि उस महिला का आयुष्मान योजना के तहत अस्पताल के रिकॉर्ड में नाम ही नहीं था।  विभाग के रिकार्ड में उस महिला के नाम से कोई कार्ड नहीं है, जिसकी विभागीय स्तर पर जांच शुरू की गई। इस दौरान कई चौकाने वाले साक्ष्य सामने आए हैं। उधर, आयुष्मान भारत के उपनिदेशक डॉ. रवि विमल ने कहा कि इस संबंध में जांच चल रही है, अभी कुछ भी कहना संभव नहीं है।

जिले में सौ से अधिक बने हैं फजी कार्ड

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक लगभग 100 कार्ड फर्जी तौर पर मिले हैं, जिनका विभाग के पास कोई रिकार्ड नहीं। इस फर्जीवाड़े का खुलासा होने पर विभाग के उच्चाधिकारियों ने एक टीम कार्ड में दर्शाए गए पते पर पहुंची, लेकिन वहां न तो उस नाम का कोई कार्डधारक ही मिला और न ही उस कार्ड पर कोई मोबाइल नम्बर। इससे लगभग एक करोड़ से अधिक रुपये का फर्जी तरीके से उपचार होने की आशंका है। हालांकि जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आएगी।

आयुष्मान मित्र पर गिर सकती है गाज 

राजकीय अस्पताल में तैनात आयुष्मान मित्रों को स्वास्थ्य निदेशालय की ओर से आईडी और पासवर्ड मुहैया कराया गए थे। ये मित्र ही कम्प्यूटर पर अपने आईडी से यह कार्ड बना सकते थे। उनकी आईडी का कोई दूसरा इस्तेमाल नहीं कर सकता। गोल्डन कार्ड बनाने वक्त उनकी आईडी से ओटीपी नंबर मिलने के बाद ही यह कार्ड बन पाता है। ऐसा करते वक्त उपभोक्ता का मोबाइल नंबर और कई अन्य जानकारियां देनी होती हैं। जांच प्रक्रिया के बाद ही मुख्यालय से गोल्डन कार्ड बनता है। आखिर ये कार्ड इनकी आईडी से कैसे बने, उच्चस्तर पर अब यह जांच चल रही है। इसमें 2 से 3 आयुष्मान मित्र पर गाज गिर सकती है।

सीएम फ्लाइंग भी कर चुकी है जांच

आयुष्मान योजना का कार्ड नीलम पुल के पास एक निजी दुकान में 50 रुपये में कार्ड बनाया जा रहा था। इसकी भनक लगते ही सीएम उड़नदस्ता उस दुकान पर पहुंचा। जहां पुलिस ने फर्जी ग्राहक बनाकर कार्ड बनाने के लिए उस दुकान पर भेजा। उस ग्राहक का पहले से आयुष्मान कार्ड बना हुआ था, इसके चलते उसका दोबारा नहीं बन सका। हालांकि उसके मोबाइल पर ओटीपी भी आया था। जबकि वह आईडी केवल आयुष्मान मित्र के पास ही थी तो दुकानदार तक यह कैसे पहुंची।

ईएसआईसी में भी हो चुका है फर्जीवाड़ा

ईएसआईसी की मातृत्व लाभ योजना में पहले ही फर्जीवाड़े का खुलासा हो चुका है। इसकी जांच अभी चल रही है। इसमें करीब आठ करोड़ रुपये तक की फर्जीवाड़ा होने की आशंका है। इसमें शहर के दो ईएसआईसी कार्यालय संदेह के घेरे में है।

 

Advertisement
Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह samayduniya7@gmail.com पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.