जल्द पहचान होगी नए ब्लड टेस्ट से स्तन कैंसर की , कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में हुई स्टडी

प्रारंभिक चरण के स्तन कैंसर से जूझ रहे रोगियों में घातक कोशिकाओं को पहचानने के लिए एक नया रक्त परीक्षण अन्य किसी भी परीक्षण से 100 गुना बेहतर है। एक नए शोध में यह दावा किया गया है। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा उपकरण विकसित किया, जो ‘ट्यूमर डीएनए’  की पहचान करने के लिए रक्त के नमूनों की जांच करता है।

इस परीक्षण को स्तन कैंसर के क्षेत्र में गेम चेंजर माना जा रहा है। 33 मरीजों पर किए गए परीक्षणों से पता चला है कि यह नया टेस्ट डीएनए के स्तर पर हो रहे बदलावों की भी पहचान कर सकता है। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि यह परीक्षण डॉक्टरों को यह पता लगाने में मदद करेगा कि कोई मरीज दवाओं के प्रति अच्छी प्रतिक्रिया दे रहा है या नहीं, ताकि उसे कीमोथेरेपी जैसे दर्दनाक इलाज से बचाया जा सके।

टारडिस नामक टेस्ट को विकसित करने वाली टीम ने कहा कि यह परीक्षण डीएनए स्तर पर हो रहे बदलावों की पहचान करने में 100 फीसदी ज्यादा प्रभावी है। यूके और अमेरिका में आठ में से एक महिला को जीवनकाल में कभी न कभी स्तन कैंसर होने की संभावना होती है। शोधकर्ताओं ने कहा, इनमें से 30 फीसदी महिलाएं जिन्हें नियोएडजुवेंट नामक थेरेपी दी जाती है, इससे वह पूरी तरह से ठीक हो जाती हैं। यह एक ऐसी थेरेपी है जिसमें कीमोथेरेपी की मदद से ट्यूमर को सुखा दिया जाता है।जर्नल साइंस ट्रांसलेशनल मेडिसिन में प्रकाशित शोध में कहा गया है कि नई तकनीक से भविष्य में इलाज की रूपरेखा बनाने में मदद मिल सकती है।

 

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