National Bone and Joint Day 2019 आज : मजबूत होंगी हड्डियां खून की चंद बूंदों से, जानें कहां किया सफल इलाज डॉक्टरों ने घुटना या कोहनी के दर्द से परेशान लोगों के लिए राहत की खबर है। इस दर्द से निजात पाने के लिए मरीजों को अब दर्द निवारक स्टेरॉयड लेने की जरूरत नहीं है। मरीज के चंद बूंद खून से बनने वाले प्लेटलेट्स रिच प्लाज्मा (पीआरपी) से ही दर्द से निजात मिल सकती है। इतना ही नहीं, यह मांसपेशियों और हड्डियों को भी मजबूत करता है। बीआरडी मेडिकल कालेज के हड्डी रोग विभाग में प्रयोग के तौर पीआरपी से इलाज शुरू हुआ है। हड्डी रोग के विभागाध्यक्ष डॉ. पवन प्रधान ने बताया कि इस विधि में प्लेटलेट्स रिच प्लाज्मा (पीआरपी) में मरीज के ही खून का प्रयोग किया जाता है। महज 10 से 15 मिलीलीटर खून निकालकर विभाग में सेंट्रीफ्यूजन मशीन में प्लाज्मा तैयार किया जाता है। यह प्लाज्मा इंजेक्शन के जरिए दर्द वाले स्थान पर लगाया जाता है। अमूमन एक या दो इंजेक्शन से बीमारी को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है। टेनिस एल्बो के 20 मरीजों पर हुआ प्रयोग : स्पोर्ट्स इंजरी सेल के प्रभारी डॉ. अमित मिश्रा ने बताया कि टेनिस एल्बो का दर्द झेल रहे 20 मरीजों पर पीआरपी का प्रयोग किया गया। इसने जबर्दस्त असर दिखाया। मरीजों को दर्द से राहत मिली। उनकी मांसपेशियां मजबूत हुई। हड्डियों का घिसाव कम हुआ। दूसरे जोड़ों के दर्द में इसका प्रयोग किया जा सकता है। असहनीय दर्द देता है टेनिस एल्बो नियमित व्यायाम न करने, चोट लगने या कम्प्यूटर पर ज्यादा देर तक काम करने से कोहनी के बाहर की तरफ दर्द होने लगता है। इसे टेनिस एल्बो कहा जाता है। इससे पीड़ित व्यक्ति को भारी सामान उठाने पर दर्द होने लगता है। हाथ मिलाना, ब्रश करते समय, सब्जी काटते समय, मुंह धोने या किसी वस्तु को तेज दबाने पर दर्द एकदम से बढ़ता है। दर्द बढ़ने के साथ ही कोहनी में सूजन हो जाती है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर को भी यह बीमारी रही। अगले चरण में घुटना दर्द के मरीजों पर होगा प्रयोग डॉ. प्रधान ने बताया कि टेनिस एल्बो के मरीजों में पीआरपी के प्रयोग के परिणाम उत्साहजनक रहे। मरीजों को दर्द से निजात के लिए स्टेरॉयड लेने की जरूरत नहीं पड़ी। यह मरीजों को स्टेरॉयड के नुकसान से भी बचाता है।

घुटना या कोहनी के दर्द से परेशान लोगों के लिए राहत की खबर है। इस दर्द से निजात पाने के लिए मरीजों को अब दर्द निवारक स्टेरॉयड लेने की जरूरत नहीं है। मरीज के चंद बूंद खून से बनने वाले प्लेटलेट्स रिच प्लाज्मा (पीआरपी) से ही दर्द से निजात मिल सकती है। इतना ही नहीं, यह मांसपेशियों और हड्डियों को भी मजबूत करता है। बीआरडी मेडिकल कालेज के हड्डी रोग विभाग में प्रयोग के तौर पीआरपी से इलाज शुरू हुआ है।

हड्डी रोग के विभागाध्यक्ष डॉ. पवन प्रधान ने बताया कि इस विधि में प्लेटलेट्स रिच प्लाज्मा (पीआरपी) में मरीज के ही खून का प्रयोग किया जाता है। महज 10 से 15 मिलीलीटर खून निकालकर विभाग में सेंट्रीफ्यूजन मशीन में प्लाज्मा तैयार किया जाता है। यह प्लाज्मा इंजेक्शन के जरिए दर्द  वाले स्थान पर लगाया जाता है। अमूमन एक या दो इंजेक्शन से बीमारी को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है।

टेनिस एल्बो के 20 मरीजों पर हुआ प्रयोग : स्पोर्ट्स इंजरी सेल के प्रभारी डॉ. अमित मिश्रा ने बताया कि टेनिस एल्बो का दर्द झेल रहे 20 मरीजों पर पीआरपी का प्रयोग किया गया। इसने जबर्दस्त असर दिखाया। मरीजों को दर्द से राहत मिली। उनकी मांसपेशियां मजबूत हुई। हड्डियों का घिसाव कम हुआ। दूसरे जोड़ों के दर्द में इसका प्रयोग किया जा सकता है।

असहनीय दर्द देता है टेनिस एल्बो
नियमित व्यायाम न करने, चोट लगने या कम्प्यूटर पर ज्यादा देर तक काम करने से कोहनी के बाहर की तरफ दर्द होने लगता है। इसे टेनिस एल्बो कहा जाता है। इससे पीड़ित व्यक्ति को भारी सामान उठाने पर दर्द होने लगता है। हाथ मिलाना, ब्रश करते समय, सब्जी काटते समय, मुंह धोने या किसी वस्तु को तेज दबाने पर दर्द एकदम से बढ़ता है। दर्द बढ़ने के साथ ही कोहनी में सूजन हो जाती है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर को भी यह बीमारी रही।

अगले चरण में घुटना दर्द के मरीजों पर होगा प्रयोग
डॉ. प्रधान ने बताया कि टेनिस एल्बो के मरीजों में पीआरपी के प्रयोग के परिणाम उत्साहजनक रहे। मरीजों को दर्द से निजात के लिए स्टेरॉयड लेने की जरूरत नहीं पड़ी। यह मरीजों को स्टेरॉयड के नुकसान से भी बचाता है।

 

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